एफडी का पैसा भी बीजेपी की राज में सुरक्षित नहीं
एफडी धारक से ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’बैंक के मैनेजर का रूढ़ व्यवहार
दिल्ली : भारत के सबसे बड़े बैंक ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ की अनाज मंडी शाखा में उसके ग्राहक भूपेन्द्र कुमार के पिता उदयराम ने अपने पुत्र के नाम से एक लाख की एफडी (संख्या - 32471874770) करा रखी थी जिसे वे समय-समय पर नवीनीकरण कराते रहते थे। इस बार इसकी परिपक्वता दिनांक 9/9/2022 को नियत थी, नवीनीकरण कराने के लिए वे 12 सितम्बर, 2022 को शाखा में पहुंचे तो एफडी शाखा के कर्मचारी ने बताया कि आपकी एफडी की राशि तो पहले ही निकाल ली गयी है। यह बात सुनकर उदयराम अवाक रह गये। तत्पश्चात उन्होंने घर जाकर अपने बेटे और परिवार को इस बारे में जानकारी दी। तब भूपेन्द्र कुमार व उसके पिता उदयराम पुन: शाखा में गये। इस बारे में बैंक मैनेजर ने बडे अभद्र व्यवहार में उनसे एक प्रार्थना देने के लिए कहा। बैंक मैनेजर ने बताया कि आपके सेविंग एकाउंट (संख्या - 32470269037) से एक क्रेडिट कार्ड (व्यापार उन्नति) जो चार वर्षों के लिए चार्ज फ्री बनाया गया था। उसी की पैमेंट करने के लिए आॅनलाइन तरीके से एफडी एकाउंट से पैसा निकाला गया जोकि उसी क्रेडिट कार्ड को 99882 (निन्यानवे हजार, आठ सौ, बयासी) रुपये का भुगतान किया जा चुका है। जबकि इस तरह के ट्रांजेक्शन का भूपेन्द्र कुमार के रजिस्टर्ड मोबाईल पर किसी प्रकार का कोई मैसेज भी नहीं आया। अपने साथ हुई इस जालसाजी की सूचना भूपेन्द्र कुमार ने पूर्वी दिल्ली के ‘साईबर क्राइम’ थाने में दर्ज करा दी है।
इस प्रकार का मामला बेहद चौंकाने वाला है कि लोगों का अब पैसा बैंक में एफडी के रूप में भी सुरक्षित नहीं होगा तो कैसे होगा? इस घटना से यह तो स्पष्ट हो ही जाता है कि इस प्रकार के अपराधों में अक्सर बैंक कर्मियों का पूरा सहयोग होता है, तभी इस प्रकार की बड़ी जालसाजी को अंजाम दिया जाता है।