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प्रकृति को मानव की चुनौति का परिणाम है, बाढ एवं सूखा

उदयपुर : विश्व में सूखे एवं बाढ की वैश्विक समस्या पर जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय एवं विश्व जन आयोग स्वीडन के संयुक्त तत्वावधान में देश में पहली बार आयोजित विश्व जल सम्मेलन के दूसरे दिन राज्य जनजातीय उद्योग एवं विकास मंत्री अर्जुन लाल बामणिया ने संबोधित किया। मंत्री श्री बामनिया ने अपने संबोधन में बाढ एवं सूखा को मानव द्वारा प्रकृति को दी गई चुनौति घोषित करते हुए पहाडों पर वृक्षों के कटाव को मृदा ह्ास का कारण बताया।

श्री बामनिया ने वृक्षारोपण को मनरेगा से जोडने का आव्हान करते हुए बांसवाडा जिले का उदाहरण दिया जहां यह नवाचार सार्थक सिद्ध हुआ है। कुलपति प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत ने बताया कि शुक्रवार को चार तकनीक सत्रों में 16 सब थीम पर चर्चा हुई। डॉ. इंदिरा खुराना एवं प्रो. मिलाप पूनिया की अध्यक्षता में आयोजित प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. प्रेमनिवास शर्मा ने विश्व बढते मिथेन गैस प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए इसका समाधान हिमालय क्षेत्र की सीढीदार खेती को बताया।

मैग्सेसे पुरस्कार विजेता एवं सूखा एवं बाढ के विश्व जन आयोग , स्वीडन के अध्यक्ष वाटर मैन ऑफ इंडिया डॉ राजेंद्र सिंह ने अध्यक्षता करते हुए मैग्सेसे पुरस्कार विजेता एवं सूखा एवं बाढ के विश्व जन आयोग, स्वीडन के अध्यक्ष वाटर मैन ऑफ इंडिया डॉ राजेंद्र सिंह ने माउंट सिनाइ का उदाहरण देकर वर्षा जल के प्रवाह को धीमा कर सुखाड़ की समस्या का समाधान की जानकारी दी। विश्व जन आयोग को डॉ. सिंह ने इसे आम आदमी की बुद्धिमत्ता पर विश्वास करने वाली संस्था बताते हुए निंयुक्त 30 कमीश्नर्स का आव्हान किया कि वे आम जन से जुड योजनाओं को मूर्त रूप प्रदान करें।

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