नई दिल्ली : भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने चाय की गुणवत्ता में सुधार और इसके सुरक्षित तथा स्वच्छ उत्पादन के लिए तमिलनाडु, केरल, असम और पश्चिम बंगाल में चाय उत्पादक क्षेत्रों के विभिन्न समूहों में एक व्यापक क्षमता निर्माण की योजना भी तैयार की है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार को यहां बताया कि एफएसएसएआई चाय उद्योग से जुड़े सभी पक्षों के साथ चाय की गुणवत्ता में सुधार करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार प्र्रयास कर रहा है। इसी संदर्भ तमिलनाडु में कुन्नूर में छोटे चाय उत्पादकों (एसटीजी) के लिए कीटनाशकों के प्रयोग पर परिचर्चा का आयोजन किया जिसमें चाय के सुरक्षित और स्वच्छ उत्पादन को सुनिश्चित करने और चाय के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन एवं बेहतर कृषि पद्धतियों की बुनियादी आवश्यकताओं पर जागरूकता फैलाने के लिए आयोजित किया गया था।
चर्चा के दौरान कीटनाशकों के छिड़काव और चाय की पत्ती तोड़ने के बीच के निर्धारित अंतराल को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया गया। सत्र के दौरान, छोटे चाय उत्पादकों को मानदंडों का पालन करते हुए कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग के महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया।
टी बोर्ड (दक्षिण-भारत क्षेत्रीय कार्यालय) के कार्यकारी निदेशक एम मुथुकुमार ने कहा कि इन उत्पादकों के पास अपेक्षाकृत नए बागान हैं जो उच्च उपज होने के साथ-साथ देश में चाय के उत्पादन में अधिक योगदान भी देते हैं।
भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक (नौ लाख टन प्रतिवर्ष) है। विश्व की 20 प्रतिशत चाय का उत्पादन दार्जिलिंग, नीलगिरि और असम में होता है। चाय दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा पिया जाने वाला पेय पदार्थ है, जिसकी सबसे ज्यादा खपत चीन, भारत, तुर्की और पाकिस्तान में होती है।
चाय की गुणवत्ता बढ़ाने पर जाेर
