श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर के ऐतिहासिक जामिया मस्जिद के प्रबंधन संस्था अंजुमन औकाफ ने शुक्रवार को प्रशासन से ‘अनुचित प्रतिबंध’ हटाने और मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति देने तथा मीरवाइज उमर फारूक पर प्रतिबंध हटाने का आग्रह किया। अंजुमन औकाफ ने एतिहासिक मस्जिद में लगातार आठवें जुमे को सबसे बड़े इबादत स्थल पर नमाज की अनुमति नहीं दिये जाने और मीरवाइज-ए-कश्मीर डॉ मौलवी मुहम्मद उमर फारूक को नजरबंद किये जाने के खिलाफ आज अपनी नाराजगी जाहिर की।
प्रशासन ने 13 अक्टूबर से जामिया मस्जिद में शुक्रवार (जुमे) की नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी है। अधिकारियों ने आशंका जाहिर की है कि जुमे की नमाज अता करने के दौरान मस्जिद से फिलिस्तीन के समर्थन में विरोध प्रदर्शन हो सकता है।
अंजुमन औकाफ संस्था ने लगातार आठवें शुक्रवार को प्रशासन द्वारा जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज की इजाजत न दिए जाने और मीरवाइज को नजरबंद किए जाने के खिलाफ चिंता और नाराजगी दोहराई। उन्होंने एक बयान में कहा, “इस एतिहासिक मस्जिद का सदियों पुराना स्थल और मिहराब लगातार आठवें शुक्रवार को नमाजियों की इबादत के बिना खामोश है।प्रशासन द्वारा इस तरह के वैमनस्य कृत्य न केवल धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप को दर्शाता हैं, बल्कि प्रदेश के जनता की भावनाओं को भी गंभीर रूप से आहत करता है।”
संस्था ने कहा कि लोगों का श्रीनगर की जामिया मस्जिद और मीरवाइज-ए-कश्मीर से गहरा धार्मिक और भावनात्मक लगाव है और यहां नमाज की इजाजत न देने से उनकी भावनाएं गंभीर रूप से आहत होती हैं। उन्होंने कहा कि मीरवाइज पर प्रतिबंध लगाना उन्हें उनकी धार्मिक स्वतंत्रता से वंचित रखने के समान है।
श्री औकाफ ने कहा कि कश्मीर के मीरवाइज के रूप में उनकी लोगों और समाज के प्रति बहुत सारी जिम्मेदारियां हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें अपने कर्तव्यों का पालन करने की अनुमति नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को कश्मीर की जनता की भावनाओं को ख्याल रखते हुए जामिया मस्जिद और मीरवाइज-ए-कश्मीर पर अपना अनुचित प्रतिबंध हटाना चाहिए।
