मुंबई : विश्व बाजार के कमजोर रुझान के बावजूद स्थानीय स्तर पर हुई लिवाली की बदौलत बीते सप्ताह बढ़त पर रहे घरेलू शेयर बाजार पर अगले सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के निवेश प्रवाह, डॉलर सूचकांक और कच्चे तेल की कीमतों का असर रहेगा।
बीते सप्ताह बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 175.31 अर्थात 0.3 प्रतिशत की तेजी के साथ सप्ताहांत पर 65970.04 अंक पर पहुंच गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 62.9 अंक यानी 0.32 प्रतिशत की बढ़त लेकर 19794.70 अंक पर रहा।
समीक्षाधीन सप्ताह में बीएसई की दिग्गज कंपनियों की तरह मझौली और छोटी कंपनियों के शेयरों में लिवाली हुई। इससे सप्ताहांत पर मिडकैप 229.81 अंक 0.7 प्रतिशत उछलकर 33610.39 अंक और स्मॉलकैप 208.66 अंक यानी 0.53 प्रतिशत चढ़कर 39807.29 अंक पर रहा।
विश्लेषकाें के अनुसार, पूरे सप्ताह घरेलू सूचकांक सकारात्मक रुझान के साथ एक दायरे में कारोबार करते रहे। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने सतर्क रुख अपनाया तथा यूरोपीय और जर्मन बाजारों के नरम रुख का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। महंगाई कम होने और अमेरिका में हाल में जारी रोजगार आंकड़ों के साथ-साथ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमी ने विदेशी निवेशकों को उभरते बाजार की ओर आकर्षित किया है।
घरेलू बाजार में मुनाफावसूली का दबाव रहा। त्योहारी मांग में जोरदार उछाल के कारण टिकाऊ उपभोक्ता सामान और रियल्टी जैसे क्षेत्रों ने बढ़त हासिल की। हालांकि कमजोर वैश्विक रुख के दबाव में आईटी क्षेत्र का प्रदर्शन कमजोर रहा। साथ ही गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा असुरक्षित ऋण देने की आरबीआई की जांच के बावजूद बीते सप्ताह बैंकिंग सूचकांक का प्रदर्शन लचीला रहा। इन वैश्विक और स्थानीय परिदृश्य के बीच अगले सप्ताह बाजार पर एफआईआई निवेश प्रवाह, डॉलर सूचकांक और कच्चे तेल की कीमतों का बाजार पर असर रहेगा।
वैश्विक रुख का बाजार पर रहेगा असर
