नई दिल्ली : स्मृति ईरानी ने कहा है कि पोषण अभियान कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए 18 मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच अभूतपूर्व सहयोग का प्रतीक है जो इस विकराल समस्या से निपटने में सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है। ईरानी ने कहा कि वर्ष 2019 से पोषण अभियान में पारदर्शिता और दक्षता के लिए तथा जमीनी स्तर पर प्रणालियों को मजबूत करने के लिए गुणवत्ता आश्वासन, कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों आदि पर सुव्यवस्थित दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कल देर शाम यहां बच्चों में कुपोषण के प्रबंधन के लिए नए मानकीकृत प्रोटोकॉल के शुभारंभ पर राष्ट्रीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड महामारी में लॉकडाउन के दौरान तैयार और बनाया गया पोषण “ट्रैकर एप्लिकेशन” जारी होने के तीन महीने के भीतर 13 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ परिवर्तनकारी के रूप में उभरा है।
उन्होंने कहा कि राज्यों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय ने शौचालयों के निर्माण की लागत को रुपये से बढ़ाने का प्रावधान किया है। सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मौजूदा 5जी सक्षम मोबाइल फोन में अपग्रेड करने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं, जिसके लिए लागत मानदंडों को उपयुक्त रूप से संशोधित किया गया है। इसके अलावा हर चार साल में मोबाइल फोन बदलने की नीति बनाई गई है।
पोषण ट्रैकर में माइग्रेशन सुविधा ने यह सुनिश्चित किया है कि एक गांव से दूसरे गांव या एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाले लाभार्थियों को आंगनवाड़ी सेवा योजना के तहत अपना लाभ मिलता रहे। मई 2022 से अब तक एक लाख से अधिक लाभार्थियों को इस सुविधा के माध्यम से सेवा प्रदान की गई है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने बच्चों में कुपोषण के प्रबंधन के प्रति अनुकरणीय समर्पण और प्रतिबद्धता के लिए विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया। बच्चों में कुपोषण के प्रबंधन के लिए प्रोटोकॉल महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने संयुक्त रूप से तैयार किया है।
कुपोषण से निपटने में जुटी सरकार
