गौरवशाली भारत

देश की उम्मीद ‎‎‎ ‎‎ ‎‎ ‎‎ ‎‎

अर्थव्यस्था में विनिर्माण क्षेत्र की 25% तक करने को गंभीर है सरकार

नई दिल्ली : हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा बढ़ा कर एक चौथाई तक पहुंचाने के लक्ष्य के प्रति गंभीर है और इस दिशा में उठाए जा रहे कदमों के फल दिख रहे हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा आवास और शहरी मामलों के मंत्री पुरी ने कहा,“ कोविड19 के बाद वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में आंतरिक बदलाव हो रहे हैं। भारत अपने कच्चे माल, कम श्रम लागत, बढ़ती विनिर्माण जानकारी और उद्यमशीलता क्षमता को देखते हुए एक वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत के रूप में उभर रहा है।” वह शुक्रवार को यहा पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के 118वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र इस समय देश के जीडीपी में 17 प्रतिशत योगदान कर रहा है ओर इस क्षेत्र में 2.73 करोड़ लोगों को काम मिला है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल विश्व आर्थिक मंच की बैठक में ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ का आह्वान किया था और उनका यह संकेत था कि भारत अपने जीडीपी में 2025 तक विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ा कर 25 तक ले जाने का तैयार और उत्सुक है।
पुरी ने कहा कि उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना ने 14 रणनीतिक क्षेत्रों में विनिर्माण में क्रांति ला दी है। उन्होंने कहा कि पीएलआई योजनाओं के कारण विनिर्माण क्षेत्र में एफडीआई में 76 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अगले पांच वर्षों में, पीएलआई योजनाओं से 60 लाख अतिरिक्त नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। पीएलआई के परिवर्तनकारी प्रभाव के बारे में बोलते हुए, मंत्री ने कहा कि तीन साल की अवधि के भीतर मोबाइल विनिर्माण में 20 प्रतिशत मूल्यवर्धन हुआ और स्मार्टफोन के निर्यात में 139 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
पुरी ने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी), आईबीसी, परिसंपत्ति मुद्रीकरण, श्रम कानून सुधार, पीएलआई, राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के लिए गति शक्ति मिशन जैसे आर्थिक सुधारों और नीतियों ने कई बुनियादी कमियां दूर की हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस समय भारत इस्पात का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक , चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क; और दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क, दोपहिया वाहनों का सबसे बड़ा उत्पादक और चार पहिया वाहनों का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है।
उन्होंने कहा कि भारत पारंपरिक ईंधन अन्वेषण और ऊर्जा संक्रमण दोनों को एक साथ आगे बढ़ा रहा है। मंत्री ने कहा कि भारत का खनिजों के अन्वेषण के तहत लाए गए क्षेत्र का दायरा बढ़ा कर 2025 तक अपने कुल भौगोलिक क्षेत्र के 15 प्रतिशत (5 लाख वर्ग किमी) तक पहुंचाना करना है। यह इस समय 8 प्रतिशत (2.5 लाख वर्ग किमी) है। उन्होंने कहा कि भारत पेट्रोलियम उत्पादों का वैश्विक निर्यातक है और वैश्विक स्तर पर चौथी सबसे बड़ी रिफाइनिंग क्षमता का रखता है। जैव ईंधन क्रांति में हासिल किए गए महत्वपूर्ण मील के पत्थर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिश्रण 2013-14 में 1.53 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में 11 प्रतिशत हो गया है। हरित हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए 19,744 करोड़ रुपये की योजना शुरू की गयी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *