चंडीगढ़ : अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी की महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा है कि हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) की निष्पक्षता एक बार फिर हरियाणा सिविल सेवा(एचसीएस) की भर्ती परीक्षा कराने के मामले में संदेह के घेरे में आ गई है। सुश्री सैलजा ने शुक्रवार को यहां जारी बयान में कहा कि पिछली बार की परीक्षा में पूछे गए सवाल इस बार फिर पूछे जाने से साफ है कि किसी बड़े भर्ती कांड की नींव रखी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि एचसीएस एग्जीक्यूिटिव ब्रांच की भर्ती के लिये गत दिनों प्रारम्भिक परीक्षा ली गई। इसकी आंसर-की जारी होते ही परीक्षार्थियों ने एचपीएससी के समक्ष अपनी आपत्ति जतानी शुरू कर दी हैं।
इनका कहना है कि सीसैट की परीक्षा पास करने के लिए 33 सवालों के ठीक जवाब चाहिएं, लेकिन जो पेपर आया, उसमें पिछली बार की परीक्षा के करीब 40 प्रश्न दिए गए थे। इससे साफ है कि चहेतों को परीक्षा पास कराने के लिए ऐसा किया गया। इसलिए राज्य की भारतीय जनता पार्टी-जननायक जनता पार्टी (भाजपा-जजपा) गठबंधन सरकार को एचपीएससी को तुरंत प्रभाव से भंग कर देना चाहिए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है, जब एचसीएस भर्ती को लेकर विवाद उठा हो। इससे पहले एचसीएस का पेपर पास कराने की एवज में कथित तौर पर करोड़ों रुपये के लेनदेन की सूचनाएं भी बाहर आई थीं। एचपीएससी के एक उप सचिव को नोटों से भरे सूटकेस के साथ पकड़ा गया था। उस समय डेंटल सर्जन और एचसीएस की परीक्षा पास कराने की एवज में राशि लिए जाने की बात उन्होंने स्वीकार की थी। उन्होंने कहा कि जो आयोग किसी भी भर्ती परीक्षा की निष्पक्षता बरकरार नहीं रख सकता है, उसे भर्ती प्रक्रिया को चालू करने का कोई अधिकार नहीं है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि तुरंत प्रभाव से आयोग के चेयरमैन और सदस्यों के खिलाफ पेपर लीक का मामला दर्ज कराते हुए आयोग को भंग करे। क्योंकि, इससे लाखों परीक्षार्थियों जो मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि रोडवेज में कंडक्टर ठेके पर रखने के बजाए, इनकी सीधे नियमित भर्ती की जानी चाहिए। कंडक्टर भर्ती को लेकर जो नियम, योग्यता आदि निर्धारित किए गए हैं, उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही दूसरे प्रदेशों के युवाओं को सामाजिक और आर्थिक आधार पर अतिरिक्त अंक देने का फैसला वापस लेना चाहिए।
