भरूच : आचार्य देवव्रत ने बुधवार को कहा कि स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए स्वास्थ्यप्रद आहार लेना जरुरी है और इसका उत्पादन प्राकृतिक कृषि के जरिए ही मिलेगा।
देवव्रत ने आज भरूच जिले के नेत्रंग के चासवड में कस्तूरबा सेवाश्रम, मरोली आश्रमशाला में धेनु गीर गौशाला अर्पण हॉल तथा औषध बाग का लोकार्पण किया। इस अवसर पर प्राकृतिक कृषि परिसंवाद का आयोजन किया गया और उनके करकमलों से छोटे और सीमांत किसानों को गौदान भी किया गया।
इस मौके पर उन्होंने कहा “जंगल में जो वृक्ष होते हैं उनमें तमाम तरह के खनिज तत्व होते हैं। कुदरती रूप से उनमें तमाम तरह के तत्व मिल जाते हैं। इसी तरह यह तत्व हमारी खेती और खेत उत्पादन में भी शामिल हो जाएं और हम यही अभियान चला रहे हैं। प्राकृतिक कृषि से ही हमारी जमीन उपजाऊ बन सकती है।”
राज्यपाल ने प्राकृतिक कृषि परिसंवाद में उपस्थित किसानों के साथ पारस्परिक संवाद स्थापित कर रासायनिक और जैविक खेती के बदले प्राकृतिक कृषि से होने वाले लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। गुजरात के करीब नौ लाख किसान प्राकृतिक कृषि की ओर लौट चुके हैं। उन्होंने गुजरात के किसानों से प्राकृतिक कृषि अपनाकर धरतीमाता को बचाने के इस महायज्ञ में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जहां बीमारी होगी, वहां कमजोरी आएगी क्योंकि बीमारी कमजोर को ही पकड़ती है। उन्होंने किसानों से कहा कि वह अपने खेतों में जीवामृत, घनजीवामृत, निमास्त्र और शतपर्णी जैसे कुदरती उपाय करें और उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक में दी गई प्राकृतिक कृषि पद्धतियों का अनुसरण करें।
किसानों का भ्रम दूर करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ज्यादा रासायनिक खाद डालने से ज्यादा उत्पादन मिलता है यह गलत मान्यता है। सच्चाई इससे बिल्कुल विपरीत है। आगामी समय में बेहतर और स्वास्थ्यप्रद आहार के लिए प्राकृतिक कृषि आधारित खेती अपनाने से खर्च घटेगा और उत्पादन भी बढ़ेगा। हम सभी देसी गाय आधारित खेती करने के लिए प्रतिबद्ध हों जाएं, यह समय की मांग है। उन्होंने किसानों की गलतफहमी दूर की और किसानों से प्राकृतिक कृषि करने का वचन गुरुदक्षिणा के रूप में मांगा।
कृषि विज्ञान केन्द्र, प्राकृतिक खेती करने वाले किसान समूहों, एफपीओ. तथा मॉडल फार्म के दो स्टॉल्स का उन्होंने निरीक्षण किया और किसानों से संवाद कर कृषि उत्पादों की जानकारी ली तथा उन्हें मार्गदर्शन दिया। कस्तूरबा सेवाश्रम, मरोली आश्रमशाला धेनु गीर गौशाला अर्पण हॉल तथा औषध बाग का लोकार्पण राज्यपाल ने किया । गौशाला में से 70 जितनी गायों में से पांच गाय प्रतीकात्मक रूप से किसानों को अर्पण की। आश्रमशाला के मैनेजिंग ट्रस्टी खुमानसिंह वासिया ने स्वागत सम्बोधन करके संस्था की प्रवृत्तियों की विस्तृत जानकारी दी।
आश्रमशाला में गार्ड ऑफ ऑनर देकर राज्यपाल का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल ने कुरुक्षेत्र-हरियाणा में उनके द्वारा की जा रही प्राकृतिक खेती की डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई।
प्राकृतिक कृषि के जरिए मिलेगा स्वास्थ्यप्रद उत्पादन
