नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय अनुवांशिक रूप से परिवर्तित सरसों यानी जीएम सरसों की पांच राज्यों में खेती के लिए अनुमति देने के विवाद के मामले में 10 नवंबर को अगली सुनवाई करेगा।
न्यायमूर्ति दिनेश महेश्वरी और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने गुरुवार को इस मामले में यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश केंद्र सरकार को दिया था। पीठ ने कहा था कि याचिकाकर्ता के आवेदन के निपटारे तक यथास्थिति बरकरार रखी जाए।
अरुणा रोड्रिग्स के एक आवेदन पर शीघ्र सुनवाई की गुहार पर अदालत ने 10 नवंबर तारीख मुकर्रर की थी। सुश्री रोड्रिग्स ने ही 2005 में रिट याचिका दायर की गई थी।
याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपने आवेदन में देश की जैव तकनीक की नियामक संस्था -जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमिटी (जीईएसी) के 18 अक्टूबर 2022 के फैसले की वैधता और केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के 25 अक्टूबर में मंजूरी देने के फैसले के चुनौती दी है। इन फैसलों में जीएम सरसों के पर्यावरणीय प्रभावों को कथित रूप से नजरअंदाज किया गया है।
जीएम सरसों पर 10 नवंबर को सुनवाई
