उदयपुर : मौसिकी के क्षेत्र में देश-दुनिया में अपनी छाप छोड़ चुके सितार वादक पंडित मोर मुकुट केडिया और सरोद वादक पंडित मनोज केडिया ने जब शिल्पग्राम के मुक्ताकाशी रंगमंच पर ऋतु बसंत उत्सव में अपने-अपने साज के तारों को अंगुलियाें से हरकत दी तो मौजूद तमाम संगीत प्रेमियों के दिल झंकृत हो गए। पश्चिम क्षेत्र संस्कृति केंद्र उदयपुर के शिल्पग्राम में चल रहे तीन दिवसीय ‘ऋतु वसंत’ महोत्सव के आखिरी दिन रविवार की शाम इन दोनों की दिलकश पेशकश से कलाप्रेमियों के लिए यादगार बन गई।
पश्चिम क्षेत्र संस्कृति केंद्र, उदयपुर के निदेशक फुरकान खान ने बताया कि दोनों वाद्ययंत्रों की संगत के साथ सांसों के जरिए दिलो दिमाग तक स्पंदन कर रही दिलकश धुनें पूरे एक घंटे तक मन को मोहती रहीं। इसके साथ ही देश-विदेश में अपने अनूठे कंटेंपरेरी और शास्त्रीय नृत्यों से पहचान बना चुके कोरियोग्राफर संतोष नायर के निर्देशन में साध्या ग्रुप की ‘नृत्य स्तुति’ की क्लासिकल के विभिन्न रूपों के जरिए तमाम स्तुतियों की पेशकश मौजूद भारतीय संगीत प्रेमियों पर अमिट छाप छोड़ गई।
पद्म विभूषण उस्ताद अली अकबर खां, गुरु मां अन्नपूर्णा देवी, पंडित सुनील मुखर्ज और पंडित शंभू दयाल केडिया के शिष्य केडिया बंधुओं ने अपनी प्रस्तुति का आगाज राग देश में आलाप जोड़ के साथ विलंबित तीन ताल से किया, जब उन्होंने इस दौरान द्रुत तीन ताल छेड़ी तो संगीत प्रेमी ने जमकर दाद दी। इस पेशकश में तान एवं तोड़े की सफाई में दोनों मूसीकारों ने अपने मैहर घराने की झलक से सभी का मन मोह लिया।
केडिया बंधु के सितार-सरोद की जुगलबंदी से झंकृत हुए दिल
