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उच्च न्यायालय ने एक मामले में एकल पीठ के आदेश को किया रद्द

जयपुर : राजस्थान उच्च न्यायालय की एक खंड पीठ ने ‘राजीव चतुर्वेदी बनाम आयुक्त जयपुर विकास प्राधिकरण एवं अन्य’ मामले में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे पर न्यायालय की एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया है।
न्यायमूर्ति पंकज भंडारी और न्यायमूर्ति भुवन गोयल की खंडपीठ ने दो दिन की लंबी बहस सुनने के बाद गत 14 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और मंगलवार को यह फैसला सुनाया।
जयपुर विकास प्राधिकरण, जयपुर ने अनुच्छेद 227 के तहत उच्च न्यायालय जयपुर के समक्ष राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी),नई दिल्ली के 14 जून 2022 और 13 अप्रैल 2023 के आदेशों को चुनौती दी गई थी।
उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने अनुच्छेद 226 का हवाला देते हुए गत एक जनवरी को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के आदेशों को रद्द कर दिया और एनसीडीआरसी के समक्ष जेडीए जयपुर द्वारा दायर की गई पहली अपील को उसके मूल नंबर पर बहाल कर दिया, इस शर्त के साथ की आवेदक को 10 हजार रुपये का भुगतान करना होगा।
इसके बाद श्री चतुर्वेदी की ओर से एकल पीठ के आदेश को उच्च न्यायालय राजस्थान की खंड पीठ के समक्ष चुनौती दी गई। जेडीए जयपुर द्वारा सेवाओं में कमी से संबंधित इस मामले में लिखित प्रतिबद्धता और प्लॉट खरीदारों से पूरा पैसा लेने के बावजूद वर्ष 2014 में घोषित आनंद विहार की आवासीय योजना विकसित नहीं की। आवेदक राजीव चतुर्वेदी मामले को वर्ष 2017 में राज्य उपभोक्ता आयोग ले गए।
उपभोक्ता आयोग जयपुर ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को मूल राशि नौ प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया। जेडीए जयपुर ने 2019 में राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग नई दिल्ली के समक्ष पहली अपील दायर की, जिसने 2022 में प्राधिकरण की अपील और 2023 में इसके बहाली आवेदन को खारिज कर दिया। इसके बाद जेडीए जयपुर ने अगस्त 2023 में उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिस पर प्राधिकरण को मामले को संबंधित उच्च न्यायालय में ले जाने का आदेश दिया गया।

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