नैनीताल : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वर्ष 2021 में चमोली जनपद के रैणी गांव आपदा में लापता लोगों के शवों को खोजने को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मंगलवार को केन्द्र एवं राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।
अजय गौतम की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की युगलपीठ में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ग्लेशियर फटने से ऋषिगंगा एवं धौलीगंगा में आयी बाढ़ के चलते रैणी गांव में भीषण तबाही हुई थी।
ऋषिगंगा जल विद्युत एवं एनटीपीसी परियोजना में लगे कई लोग लापता हो गये थे और 206 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि आपदा में लापता लोगों और शवों को सरकार खोजने में असमर्थ रही है। अभी भी 122 लोग लापता हैं, जिनमें नेपाल और विभिन्न राज्यों के लोग शामिल हैं।
शवों को खोजना व उनका विधिवत अंतिम संस्कार करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उनकी ओर से अदालत के संज्ञान में यह भी तथ्य लाया गया कि सन् 2013 में आयी केदारनाथ आपदा में भी 3322 लोग लापता हैं। जिनकी तलाश करने में प्रदेश सरकार असफल रही है। उनकी ओर से वर्ष 2021 में दायर जनहित याचिका के बाद ही कुछ शवों को बरामद किया गया था।
लापता लोगों की तलाश को लेकर हाईकोर्ट ने केन्द्र से मांगा जवाब
