नैनीताल : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राजधानी देहरादून के ‘खूनी फ्लाई ओवरों’ के मामलों में गंभीर रूख अख्तियार करते हुए सोमवार को केन्द्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। साथ ही दोनों फ्लाईओवरों के संबंधित दस्तावेज अदालत में तलब किये हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की युगलपीठ में दिल्ली निवासी आकाश वशिष्ठ की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि देहरादून में बल्लीवाला और आईएसबीटी फ्लाई ओवर लोगों की जान के दुश्मन बन गये हैं। फ्लाई ओवरों के गलत डिजाइन के चलते लगातार दुर्घटनायें हो रही हैं और 40 लोग अभी तक जान गंवा चुके हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि केन्द्र सरकार की ओर से बल्लीवाला में फोरलेन फ्लाई ओवर बनाने की अनुमति दी गयी थी। इसके लिये बजट भी जारी किया गया है लेकिन राज्य सरकार की ओर से दो लेन फ्लाई ओवर का निर्माण किया गया है। इससे यहां पर लगातार दुर्घटनायें हो रही हैं।
अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने के साथ ही दोनों फ्लाई ओवरों से संबंधित सभी दस्तावेज अदालत में पेश करने के निर्देश दे दिये। अदालत ने फोर लेन की जगह टू लेन फ्लाई ओवर के निर्माण पर भी सवाल उठाये? अदालत ने दोनों फ्लाई ओवरों को खूनी फ्लाई ओवर की संज्ञा देते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, सचिव आवास और देहरादून के जिलाधिकारी को पक्षकार बनाने को कहा है। साथ ही केन्द्र सरकार को पुराने आदेश के अनुपालन के मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिये हैं।
दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से देहरादून स्मार्ट सिटी मामले को लेकर आज जवाबी हलफनामा दायर किया गया। अदालत इस मामले में अगली तिथि 05 जनवरी को सुनवाई करेगी। यहां बता दें कि याचिकाकर्ता की ओर से वर्ष 2021 में एक जनहित याचिका के माध्यम से दून वैली महायोजना (मास्टर प्लान) मामले को चुनौती दी गयी है। जनहित याचिका में कहा गया कि केन्द्र सरकार ने 1989 में एक अधिसूचना जारी कर दून वैली के विकास के लिये मास्टर प्लान और टूरिज्म डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश दिये थे।
आगे कहा गया कि प्रदेश सरकार की ओर से न तो दून वैली मास्टर प्लान और न ही टूरिज्म डेवलपमेंट प्लान तैयार किया गया है। इससे दून वैली का अनियंत्रित विकास हो रहा है। इसका विपरीत असर दून वैली के पर्यावरण, नदियों, जल स्रोतों और जंगलों पर पड़ रहा है।
