बिलासपुर : हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला में बारिश के बाद अब ‘सुंडी कीट’ ने मक्की की फसल को बर्बाद करना शुरू कर दिया है। इससे किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिख रही है। किसानों को इससे पहले गेहूं की फसल में भी नुकसान उठाना पड़ा था।
पहले बारिश के कारण मक्की की बुवाई समय पर नहीं हो पाई और अब सुंडी कीट ने मक्की की फसल को बर्बाद करना शुरू कर दिया है। जिला में 26 हजार हेक्टेयर में मक्की का उत्पादन होता है। जिला में विभाग ने इस बार 40 हजार मीट्रिक गेहूं की पैदावार का लक्ष्य रखा था, लेकिन इस बार 26 हजार 400 मीट्रिक फसल का उत्पादन ही हुआ था। वहीं अब मक्की की फसल को लगे सुंडी कीट से इस फसल के बर्बाद होने का डर सताने लगा है।
जिला के कल्लर, छड़ोल व तनबौल आदि क्षेत्रों में सुंडी कीट के कारण मक्की की फसल बर्बाद हो गई है। विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वह मक्की को बचाने के लिए क्लोरोपाइरीफॉस और साइपर मैथीन के घोल का स्प्रे करें। इसके अतिरिक्त किसान कोरोजीन का स्प्रे भी कर सकते हैं। विभाग का मानना है कि इनका स्प्रे करने से मक्की की फसल को सुंडी कीट से बचाया जा सकता है।
विभागीय विशेषज्ञों के मुताबिक बिजाई से पहले खेतों में गहरा हल चलाएं, ताकि इस कीट के प्यूपे तेज धूप व पक्षियों द्वारा नष्ट किए जा सके। जहां संभव हो वहां 200 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से नीम की खली भूमि पर डाल दें। खेतों की मेढ़ों को साफ रखें और आसपास गेंदा फूल व सूरजमुखी फूल उगा दें। मक्की की बिजाई समय पर करें तथा मक्की की फसल के बीच में अरहर, लोबिया व माश आदि अंतरवर्तीय फसलें उगाएं।
इसके अतिरिक्त सुंडी कीट लगने पर किसान कीटनाशक दवाईयों क्लोरोपरिफाॅग व साइपर मैथीन को एकत्रित करके एक लीटर पानी में दो मिलीलीटर दवा मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त किसान कोरोजिन दवाई का छिड़काव भी कर सकते हैं।
हिमाचल : फसलों पर ‘सुंडी कीट’ का आक्रमण
