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जोशीमठ में दरार वाले मकानों की संख्या में वृद्धि

चमोली : उत्तराखंड के चमोली जिला आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ाें के मुताबिक जोशीमठ में दरारों वाले भवनों की संख्या 868 हुई जिनमें से 181 भवन असुरक्षित क्षेत्र में स्थित हैं। जिला प्रशासन ने स्वीकार किया कि पांच और मकानों में दरारें आने की खबर है।
जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने बताया कि पांच और मकानों में दरारें आने की जानकारी मिली हैं। उनमें क्रैक मीटर लगाये गये हैं। आवश्यकता होगी तो उनमें रह रहे लोगों को शिफ्ट किया जायेगा। कुछ ऐसे घर हैं जहां कोई निवास नहीं करते।
वहीं जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति का कहना है कि सरकार के आंकड़ो से अधिक मकानों में दरारें आयी हैं। प्रशासन अब सर्वेक्षण नहीं कर रहा है। इस लिए दरार युक्त मकानों के सही आंकड़े सामने नहीं आ रहे हैं।
संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने बताया संघर्ष समिति के लगातार चल रहे धरने के तहत मंगलवार को 530 से अधिक लोग आये। यहां प्रभावितों ने बताया कि कुछ और मकानों में दरारें आयी हैं। पर अब प्रशासन की ओर से मकानों पर दरारों का सर्वेक्षण करने कोई नहीं आ रहा है। उन्होंने बताया कि मनोहर बाग के निवासियों के मुताबिक उनके वार्ड में दरारों के बाद गड्डे बन रहे हैं।
जिला आपदा प्रबंधन विभाग ने जानकारी देते हुए बताया जोशीमठ के जे पी परिसर में आने वाले पानी का रिसाव 540 एलपीएम से घटकर 16 एलपीएम हो गया है।
जोशीमठ में भूधंसाव से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास हेतु प्रीफेब्रिकेटेड भवनों का निर्माण कार्य किया जा रहा है। जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने मंगलवार को जोशीमठ में भूधंसाव से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए जोशीमठ नगर में उद्यान विभाग की भूमि और ढाक में बन रहे प्रीफेब्रिकेटेड भवन निर्माण कार्यो का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया कि निर्माण कार्यो को तेजी से पूरा करें।
आपदा प्रभवितों के लिए ढाक में केन्द्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रूडकी के सहयोग से कार्यदायी संस्था आरडब्लूडी के माध्यम से प्रीफ्रेब्रिकेटेड भवन बनाए जा रहे है। ढाक में विद्युत लाईन विछा दी गई है।
आपदा प्रबंधन अधिकारी एन के जोशी ने बताया यहां पर समुचित आवासीय व्यवस्थाएं भी जुटाई जा रही है। प्रभावितों के पुनर्वास हेतु ढाक मे जल्द ही प्री फैब कालोनी बनकर तैयार हो जाएगी। वही जोशीमठ में टीसीपी तिरहा के पास उद्यान विभाग की भूमि पर प्री फैब निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, यहां पर एक बीएचके तैयार हो गया है जबकि दो बीएचके व तीन बीएचके भवन का कार्य अंतिम चरण में है।

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