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सेक्स वर्कर्स की दुर्दशा पर कार्रवाई का निर्देश

केंद्रपाड़ा : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने ओडिशा के मुख्य सचिव (सीएस) और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को राज्य की ओर से सेक्स वर्करों के प्रति उठाए गए निवारक, दंडात्मक, सुधारात्मक और पुनर्वास उपायों पर आठ सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता राधाकांत त्रिपाठी द्वारा दायर एक याचिका और अधिकारियों से प्राप्त प्रतिक्रिया पर कार्रवाई करते हुए एनएचआरसी ने हाल ही में आदेश पारित किया है। याचिकाकर्ता ने मास्टर कैंटीन/माली साही और भुवनेश्वर के अन्य क्षेत्रों में वेश्यालय में यौनकर्मियों के रूप में काम करने वाली लड़कियों और महिलाओं की दुर्दशा को लेकर रिपोर्ट मांगा है। इनमें से अधिकांश लड़कियां/महिलाएं मानव तस्करी की शिकार हैं। विश्व कप हॉकी के दौरान उनमें से कुछ को न्यूनतम जीवन समर्थन के बिना आश्रयहीन बना दिया गया था।
भले ही पुलिस थानों में एंटी ट्रैफिक यूनिट हो लेकिन वह प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही है और पुलिस देह व्यापार की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए गंभीर कदम नहीं उठाती है और तस्करी से निपटने के लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति की कार्यप्रणाली संतोषजनक नहीं है। त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि अनैतिक तस्करी (रोकथाम) अधिनियम 1956 के तहत स्थापित वैधानिक संस्थान काम नहीं कर रहा है. पीड़ितों को आंगनवाड़ी योजना और एकीकृत बाल विकास योजना (आईसीडीएस) जैसी विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया गया है। त्रिपाठी ने यह भी आरोप लगाया कि सेक्स वर्कर्स के अधिकारों के बारे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का राज्य द्वारा अनुपालन नहीं किया गया है। उन्होंने एनएचआरसी से यौनकर्मियों और उनके बच्चों के सामने आने वाली समस्याओं के समग्र उपायों तथा स्थायी समाधान के लिए अनुरोध किया।

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