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बीमाकर्मियों ने मुर्मू से लगाई न्याय की गुहार

नई दिल्ली : सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के कर्मचारी संगठनों ने वित्तीय सेवाओं के निदेशालय (डीएफएस) पर बीमा कंपनियों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से हस्तक्षेप कर सरकारी क्षेत्र की बीमा कंपनियों को बचाने के लिए निष्पक्ष एजेंसी से मामले की जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। कर्मचारी संगठन ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा है कि बीमा कंपनियों को बर्बाद करने के लिए डीएफएस के संयुक्त सचिव सौरभ मिश्रा जिम्मेदार हैं और वह वित्तीय संस्थानों के लिए वित्त मंत्रालय के दिशानिर्देशों तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ज्ञान संगम कार्यक्रम के दौरान दिये निर्देशों की अवहेलना कर रहे हैं। मिश्रा के फैसलों से सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियां कमजोर हो रही हैं और ग्राहक सेवा एवं आम जनता के हितों पर विपरीत असर पड़ रहा है।
जनरल इश्योरेंस इम्पलाइज ऑल इंडिया एसोसिएशन (जीआईईएआईए) के महासचिव त्रिलोक सिंह ने पत्र में कहा है कि सार्वजनिक साधारण बीमा कंपनियों के प्रबंधन ने डीएफएस की सलाह पर ‘अर्नेस्ट एंड यंग’ (ई एंड वाई) को इन कंपनियों को लाभकारी बनाने के लिए सुझाव देने के वास्ते सलाहकार नियुक्त किया जिसकी सिफारिशों के क्रियान्वयन से बीमा कंपनियां बर्बाद हो रही हैं। उन्होंने कहा कि डीएफएस और ई एंड वाई की सलाह पर मोटर वाहन बीमा व्यापार नीति में सभी क्षेत्रों के लिए जो छूट की सिफारिशें की हैं वे सब आत्मघाती हैं और कर्मचारियों के सभी घटकों ने इसका विरोध किया था।

इसी तरह से दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों के लिए सार्वजनिक सामान्य बीमा कंपनियों के प्रबंधन ने डीएफएस की सिफारिशों का पालन करते हुए केपीआई और संगठनात्मक पुनर्गठन को लागू किया जिसके कारण दो साल के भीतर बीमा कंपनियों के 1000 से ज्यादा कार्यालयों पर ताले लग गये। सिंह ने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है कि बीमा कंपनियों को बर्बाद करने में मिश्रा अहम भूमिका निभा रहे हैं, इसलिए पूरे प्रकरण की जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, अध्यक्ष बीमा विनयामक और विकास प्राधिकरण के साथ ही आयुक्त केंद्रीय सतर्कता आयोग को भी पत्र की प्रतिलिपि भेजी है।

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