नई दिल्ली: भारतीय शहद की गुणवत्ता से प्रभावित इजरायल भारत से सालाना एक हजार टन शहद का आयात करेगा।
सरकारी स्तर पर शहद के आयात को लेकर इजरायल और भारत के बीच बातचीत चल रही है और इसे जल्दी ही मूर्तरूप दिये जाने की संभावना है। इजरायल के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में भारत की यात्रा की है और उच्च स्तरीय वार्ता की है।
इजरायली दूतावास में कृषि मामलों के प्रभारी येर एशेल और जाने-माने बागवानी विशेषज्ञ राफेल एब्राहम स्टर्न ने मीडिया को जानकारी दी कि इजरायल भारत को वैज्ञानिक ढंग से मधुमक्खी पालन के लिए अपनी विशेषज्ञता देगा, जिससे बड़े पैमाने पर शहद का उत्पादन हो सकेगा और गरीब किसानों को भारी आर्थिक लाभ होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय शहद प्राकृतिक रूप से इजरायल के शहद से उच्च गुणवत्ता का है। इजरायल में लोग औषधीय गुणों के कारण बड़े पैमाने पर शहद का उपयोग करते हैं। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए वह शहद का अलग-अलग देशों से आयात करता है।
उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन बहुत कम लागत में किया जा सकता है और इससे अनेक उत्पाद तैयार किये जाते हैं जिससे किसानों की आय में भारी वृद्धि हो सकती है। मधुमक्खी पालन से फसलों खासकर बागवानी फसलों को परागण के कारण काफी लाभ होता है और इससे उत्पादन बढ़ जाता है। अमेरिका के किसान नकदी फसलों की खेती में इसका लाभ ले रहे हैं। दोनों कृषि विशेषज्ञाें ने कहा कि भारत में प्राकृतिक रूप से मधुमक्खी पालन की अपार संभावनायें हैं और इसको बढ़ावा देने के लिए वे अपनी तकनीकी सुविधायें उपलब्ध करा सकते हैं।
इजरायल पिछले 15 वर्षों से भारत में उत्कृष्टता केन्द्रों को तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहा है। फलों और सब्जियों को लेकर देश के 23 राज्यों में उत्कृष्टता केन्द्र स्थापित किये गये हैं। इन राज्यों में पंजाब, हरियाणा, बिहार, उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु प्रमुख हैं। इसके साथ ही 45 उत्कृष्टता केन्द्र जल्दी ही तैयार हो जायेंगे। किसानों को गांव स्तर पर उच्च तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराने के लिए भारत इजरायल ग्रामीण उत्कृष्टता केन्द्र की भी स्थापना की जा रही है। देश के 12 राज्यों में 150 ऐसे केन्द्र स्थापित किये जायेंगे। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और उनका बेहतर रहन सहन हो सकेगा।
उत्कृष्टता केन्द्रों के माध्यम से बड़े पैमाने पर किसानों को फलों और सब्जियों के उच्च गुणवत्ता के रोपण सामग्री उपलब्ध कराया जाता है। इसके साथ ही इन केन्द्रों में प्रत्येक वर्ष लाखों किसानों को नवीनतम कृषि तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाता है।
भारत में सालाना सवा लाख टन से अधिक शहद का उत्पादन हो रहा है, जिसमें से 60 हजार टन से ज्यादा प्राकृतिक शहद का निर्यात किया जाता है। शहद की गुणवत्ता बढ़ाकर दुनिया के बाजार को कवर कर सकें, इस दिशा में भारत सरकार और राज्य सरकारों की ओर से तो तैयारी की जा रही है, वैसी ही गतिशीलता की अपेक्षा शहद उत्पादक किसानों और अन्य संबंधित लोगों से भी की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर में पुलवामा, बांदीपुरा तथा जम्मू,कर्नाटक के तुमकुर, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, महाराष्ट्र के पुणे और उत्तराखंड में शहद परीक्षण प्रयोगशाला एवं प्रसंस्करण इकाइयों का हाल ही कृषि मंत्री ने उद्घाटन किया है। छोटे किसानों को सशक्त करना सरकार का लक्ष्य है, जिसे हासिल करने में मधुमक्खीपालन जैसे कृषि के सह-कार्यों का काफी योगदान हो इसकेगा। भारत की लगभग 55 प्रतिशत आबादी ग्रामीण है, जिनकी प्रगति से ही हमारा देश एक विकसित राष्ट्र बन सकेगा।
देश में मीठी क्रांति लाने के लिए सरकार बहुत गंभीरता से काम कर रही है। केंद्र सरकार ने देश में विश्व स्तरीय प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं, राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन नामक केंद्रीय वित्त पोषित योजना द्वारा पांच बड़ी क्षेत्रीय एवं 100 छोटी शहद तथा अन्य मधुमक्खी उत्पाद परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने का लक्ष्य है, जिनमें से
तीन विश्व स्तरीय अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं खोली जा चुकी हैं, वहीं मंजूर 25 छोटी प्रयोगशालाएं स्थापना प्रक्रिया में हैं। कोशिश है कि छोटे किसानों को शहद परीक्षण के लिए दूर नहीं जाना पड़े। प्रोसेसिंग यूनिट स्थापना के लिए भी केंद्र सरकार सहायता दे रही है।
मधुमक्खी पालन के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज दिय़ा गया है। सरकार की कोशिश है कि सभी के सहयोग से गांवों में आम गरीब किसानों एवं खेतिहर मजदूरों को मधुमक्खी पालन से जोड़कर, कम पैसे-कम लागत में ट्रेनिंग देकर उनके जीवन स्तर में बदलाव लाया जाये। सरकार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है, ताकि किसानों की आय बढ़ें।
