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इसरो ने मछुआरों की दूसरी पीढ़ी का डिस्ट्रेस अलर्ट ट्रांसमीटर किया विकसित

चेन्नई : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने समुद्र में मछुआरों के लिए मछली पकड़ने वाली नौकाओं से आपातकालीन संदेश भेजने के लिए एक स्वदेशी तकनीकी समाधान दूसरी पीढ़ी का डिस्ट्रेस अलर्ट ट्रांसमीटर (डीएटी) विकसित किया है। इसरो ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि इसमें संदेश एक संचार उपग्रह के माध्यम से भेजे जाते हैं और एक केंद्रीय नियंत्रण स्टेशन (आईएनएमसीसी- भारतीय मिशन नियंत्रण केंद्र) पर प्राप्त होते हैं जहां मछली पकड़ने वाली नाव की पहचान और स्थान के लिए चेतावनी संकेतों को डिकोड किया जाता है।

निकाली गई जानकारी भारतीय तट रक्षक (आईसीजी) के तहत समुद्री बचाव समन्वय केंद्रों (एमआरसीसी) को भेज दी जाती है। इस जानकारी का उपयोग करके एमआरसीसी संकट में फंसे मछुआरों को बचाने के लिए खोज एवम बचाव अभियान चलाने के लिए समन्वय करता है।
डीएटी 2010 से चालू है और अब तक 20 हजार से अधिक डीएटी का उपयोग किया जा रहा है। खराब मौसम, चक्रवात सुनामी या कोई अन्य आपात स्थिति के दौरान समुद्र में मछुआरों को पहले से ही चेतावनी संदेश भेजने का काम करेगी। डीएटी-एसजी के उपयोग से मछुआरों को मछली पकड़ने में अच्छी उपज मिलती है। समय और ईंधन की बचत होती है। इसरो के अध्यक्ष एस.सोमनाथ ने आईएनएमसीसी, आईएसटीआरएसी, बेंगलुरू में भारतीय तट रक्षक के महानिदेशक राकेश पाल की उपस्थिति में डीएटी-एसजी का उद्घाटन किया। डीएटी-एसजी की सेवाएं 24 घंटे जारी रखी जायेंगी।

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