नई दिल्ली : वह नहीं जा सकती तो क्या , आदित्य को तो जाना चाहिए । उसका बेटा अकेला क्या -क्या करेगा ? कहीं उसे बुरा न लग जाए? उसने बड़ी मशक्कत के साथ मुश्किल भरे दिनों में हीरे का बनवाया हार आदित्य को दिया , जिसे वो अपनी पुत्रवधू को उपहार में देंगे । आदित्य एअरपोर्ट के लॉन्ज में बैठे अपनी पिछली चालीस वर्ष की जिंदगी का भ्रमण कर आये थे । जैसे उनकी तंद्रा टूटी वे काउंटर की तरह भागे । पूछताछ करने पर पता चला कि वाशिंगटन की फ्लाइट आधे घंटे पहले अपने नियत समय पर जा चुकी है । यह बानगी ‘दूर के नीड़ ‘ कहानी की है ।

इसी तरह के विभिन्न अनछुए पहलू पर अपनी लेखनी चलाने का काम जय प्रकाश पांडेय ने किया है । दूर नीड़ के पक्षी ‘ नामक किताब में पच्चीस कहानियों का संग्रह है । ये मार्मिक कहानियां पाठक को अंदर तक झिंझोड़ देती हैं । इन कहानियों को पढ़कर कोई यह नहीं कह सकता कि लेखक ने पहला प्रयास किया है । हालांकि, जय प्रकाश पांडेय पहले से ही हिंदी पाठकों के दिलों पर कविताओं के जरिए राज्य कर रहे हैं ।
जय प्रकाश पांडेय इसलिए तारीफ के काबिल हैं क्योंकि वे भारत सरकार के शिक्षा विभाग में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं ।विभाग की तमाम जिम्मेदारियों को पूरी तन्मयता से निभाते हुए , उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का दुरूह कार्य किया है ।
