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जेकेएसटीसीबी धोखाधड़ी मामला

ईडी ने जब्त की 193.46 की अचल सम्पत्ति

श्रीनगर : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जम्मू-कश्मीर राज्य सहकारी बैंक (जेकेएसटीसीबी) के साथ वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामले में प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में 193.46 करोड़ रुपये मूल्य की एक अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। ईडी के अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
जम्मू-कश्मीर सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद शफी डार को द रिवर झेलम को-ऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी (काल्पनिक फर्म) के अध्यक्ष मोहम्मद हिलाल ए मीर से संबंधित मामले में गिरफ्तार किए जाने के लगभग तीन सप्ताह बाद श्रीनगर के शिवपोरा में 257 कनाल और 19 मरला भूमि के रूप में संपत्ति कुर्क की गई थी। दोनों 20 दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में हैं।
उल्लेखनीय है कि 2019 में जेकेएसटीसीबी के तत्कालीन अध्यक्ष और अन्य द्वारा एक काल्पनिक सहकारी समिति- श्रीनगर के शिवपोरा स्थत रिवर जेहलम को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी को 250 करोड़ का ऋण मंजूर किया गया था। ईडी ने श्रीनगर के भ्रष्टाचार विरोधी निकाय द्वारा पांच आरोपियों के खिलाफ रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) और जम्मू- कश्मीर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (जेके पीसी अधिनियम) 2006 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) और परिणामी आरोपपत्र के आधार पर जांच शुरू की थी।
हिलाल मीर और मोहम्मद शफी डार के अलावा रिवर झेलम को-ऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी के सचिव अब्दुल हामिद हजाम, प्रदेश की सहकारी समितियों के तत्कालीन रजिस्ट्रार मोहम्मद मुजीब उर रहमान घासी और प्रदेश की सहकारी समितियों के तत्कालीन उप रजिस्ट्रार सैयद आशिक हुसैन के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था।
ईडी की जांच से पता चला कि धोखाधड़ी से प्राप्त धन का उपयोग कुर्क की गई अचल संपत्ति को हासिल करने के लिए किया गया था। ईडी ने एक बयान में कहा कि इससे पहले विभिन्न स्थानों पर तलाशी और सर्वेक्षण भी किए गए थे और आपत्तिजनक दस्तावेजों तथा डिजिटल उपकरणों के रूप में सबूत जब्त किए गए थे।

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