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बदलाव लाई है लाड़ली लक्ष्मी योजना

भोपाल : शिवराज सिंह चौहान ने कहा है‍ कि लाड़ली लक्ष्मी योजना प्रदेश की बेटियों के जीवन में बदलाव लाने वाली योजना सिद्ध हुई है। इस योजना के क्रियान्वयन से सिर्फ बेटियों को छात्रवृत्ति राशि ही नहीं मिली बल्कि उनके सशक्तिकरण का नया युग प्रारंभ हुआ है।
चौहान आज यहां कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी बेटियां के खातों में छात्रवृत्ति राशि का अंतरण कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक से 3 लाख 33 हजार 842 लाड़ली लक्ष्मी बालिकाओं के लिए 107 करोड़ 67 लाख रुपए की छात्रवृत्ति राशि अंतरित की। इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए 5 लाड़ली लक्ष्मी बालिकाओं को पुरस्कार भी दिए गए। कार्यक्रम का प्रसारण वेबकास्ट और अन्य माध्यमों से संपूर्ण प्रदेश में किया गया। विभिन्न जिलों में पंचायतों और आंगनवाड़ी केन्द्रों में भी बहनें और बेटियां इस कार्यक्रम से जुड़ीं।
प्रदेश में 44 लाख से अधिक लाड़ली लक्ष्मी बेटियाँ हैं। गत 16 वर्ष में योजना की वर्ष दर वर्ष हुई प्रगति और बढ़ते महत्व की जानकारी भी कार्यक्रम में दी गई। आज कक्षा 6, 9, 11 एवं 12 में अध्ययरत सवा तीन लाख से अधिक बालिकाओं के लिए छात्रवृत्ति राशि का वितरण हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के विस्तार से अब लाड़ली लक्ष्मी 2.0 के अंतर्गत उच्च शिक्षा के लिए फीस भरने का कार्य भी सरकार करेगी। इसी तरह लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की महिलाएं एक हजार रूपए प्रतिमाह की राशि प्राप्त करेंगी। बालिकाओं और बहनों को सशक्त बनाकर पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति अभियान और अन्य सामाजिक अभियानों में उनकी भागीदारी से उन्हें नेतृत्व करने की भूमिका में लाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में भोपाल की महापौर मालती राय उपस्थित थीं।
चौहान ने कहा कि वर्ष 2007 में प्रारंभ की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना में बालिकाओं के जीवन में परिवर्तन लाने का कार्य किया है। इस योजना के लागू होने से समाज की मनोवृत्ति में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। बेटियों के जन्म को भी प्रोत्साहन मिला है। बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर नियंत्रण हुआ है। शिक्षा में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ी है। परिवार में जन्म लेने वाली बेटियों का विद्यालयों में शत-प्रतिशत नामांकन भी होने लगा है।
उन्होंने कहा कि उन्हें विधायक बनने के पूर्व एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बेटियों के पक्ष में भाषण देने पर एक बुजुर्ग महिला से ये चुनौती मिली कि क्या आप परिवार की बालिकाओं के विवाह का प्रबंध करेंगे। इस घटना ने लाड़ली लक्ष्मी योजना की भावभूमि तैयार की। चौहान ने कहा कि पहले जब परिवारों में बेटे और बेटी के जन्म के समय ही भेदभाव देखने को मिलता था, तो कष्ट होता था। उन्होंने वर्ष 1990 में विधायक, वर्ष 1991 में सांसद और वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद बालिकाओं के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास बढ़ाते हुए आज बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता देने का कार्य प्रारंभ किया है।
चौहान ने कहा कि बेटियों को बोझ न रहने देने के संकल्प की पूर्ति में प्रारंभ में दिक्कतें भी आयीं। राज्य सरकार द्वारा बजट की व्यवस्था और लाड़ली लक्ष्मी योजना को पढ़ाई से जोड़कर क्रियान्वित किए जाने से बालिकाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। यही वजह है कि आज शिक्षा के साथ बालिकाओं ने खेल क्षेत्र और संस्कृति के क्षेत्र के अलावा अन्य गतिविधियों में भागीदारी के उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। इनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 के माध्यम से महाविद्यालय में प्रवेश लेने पर फीस की व्यवस्था राज्य सरकार कर रही है। मेडिकल, इंजीनियरिंग, लॉ के पाठ्यक्रमों के साथ उच्च शिक्षा से जुड़े अन्य पाठ्यक्रमों के लिए भी राज्य सरकार फीस की व्यवस्था करेगी। बेटियों की शिक्षा से परिवार सशक्त होगा। परिवारों के सशक्त होने से समाज और राष्ट्र सशक्त होता है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का नया युग प्रारंभ हुआ है। प्रारंभ में बालिकाओं को छात्रवृत्ति और साइकिल देने की ही व्यवस्था थी। शिक्षा में आर्थिक सहयोग से बालिकाओं को प्रत्यक्ष सहायता मिली है। अब बालिकाएं नेतृत्व करने के लिए तैयार हो रही हैं।
चौहान ने कहा कि लाखों परिवारों की म‍हिलाओं को प्रसव के पूर्व और पश्चात दो किश्तों में कुल 16 हजार रूपए की राशि प्रदान करने, स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत पदों पर आरक्षण और पुलिस की भर्ती में बेटियों के लिए 30 प्रतिशत पदों पर आरक्षण से परिवर्तन देखने को मिल रहा है। परिवारों में स्वागतम लक्ष्मी और बेटी के जन्म पर उत्सव का वातावरण और प्रसन्नता देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना प्रारंभ होने के पश्चात 16 वर्ष में ऐसी अनेक बच्चियाँ जिन्हें गोद में खिलाया था, अब कॉलेज जाने लगी हैं। बच्चियां खूब आगे बढ़ें और यह सिद्ध करें कि वे किसी से कम नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम उनके लिए सिर्फ एक कार्यक्रम न होकर परिवार में आकर भेंट और संवाद करने का विशेष अवसर है। श्री चौहान ने कन्या पूजन से कार्यक्रम की शुरूआत होने के पश्चात मंच पर अपने साथ लाड़ली लक्ष्मी बेटियों को भी मंच पर बिठाया। उन्होंने प्रतीक स्वरूप चार बालिकाओं कु रेखा, कु. कामिनी, कु. प्रभा और कु. संगीता को छात्रवृत्ति राशि प्रदान की।
कार्यक्रम में सुलोचना साहू ने बताया कि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में सिलाई कारखाने में कार्य करके दो बेटियों के पालन-पोषण का कार्य किया। दोनों बेटियों को लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ मिला है। श्रीमती सुलोचना ने परिवार की विपदा का उल्लेख किया, जिसे सुनकर मुख्यमंत्री चौहान भी भावुक हो गए। उन्होंने परिवार को हरसंभव सहयोग के निर्देश अधिकारियों को दिए। इसी तरह योजना का लाभ ले रही कु. नंदिनी तिवारी ने भी अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में कुल 05 लाड़ली लक्ष्मी बेटियों का सम्मान किया गया, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल की है। इनमें कु. सानिया बाथम भोपाल, खेल क्षेत्र, कु.पलक तोमर शिवपुरी, विज्ञान के क्षेत्र में, कु. रेणुका मिश्रा रीवा, शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में, कु. वंशिका माहेश्वरी बैतूल, खेल क्षेत्र में और कु. रिषिका राहोत इंदौर खेल क्षेत्र में शामिल हैं। कार्यक्रम के समापन अवसर पर सीहोर जिले के इछावर की कु. हर्षिता व्यास के गीत गायन का अवसर दिलवाने के आग्रह पर मुख्यमंत्री ने उसी समय हर्षिता को गीत प्रस्तुत करने के लिए मंच दिया।
चौहान के साथ लाड़ली लक्ष्मी बेटियों ने समूह छायाचित्र खिंचवाया और सेल्फी भी लीं। प्रारंभ में मध्यप्रदेश गान और लाड़ली की प्रस्तुति हुई। मुख्यमंत्री का संचालक, महिला एवं बाल विकास डॉ. आर.आर. भोंसले ने तुलसी के पौधे से स्वागत किया। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी, विभागीय अधिकारी और बड़ी संख्या में लाड़ली लक्ष्मी बेटियाँ और उनके परिजन उपस्थित थे। आज हुए कार्यक्रम में 3 लाख 33 हजार 842 लाड़ली लक्ष्मी बेटियों के खाते में 107 करोड़ 67 लाख रुपए की छात्रवृत्ति राशि अंतरित की गयी।

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