भुज : आचार्य देवव्रत ने सोमवार को कहा कि प्रकृति को बचाने और आनेवाली पीढ़ी को स्वस्थ और समृद्ध बनाने के लिए रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाएं। देवव्रत ने आज कच्छ के भुज के लालन कॉलेज ग्राउंड में आयोजित प्राकृतिक कृषि परिसंवाद में महिला किसानों, शाला शिक्षकों, योग शिक्षकों तथा सखीमंडल की बहनों के साथ प्राकृतिक कृषि परिसंवाद करके समग्र कच्छ में प्राकृतिक कृषि पर जागृति फैलाने और प्राकृतिक कृषि अपनाने का अनुरोध किया और कहा कि प्रकृति को बचाने और आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ- समृद्ध बनाने के लिए रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाना ही एकमात्र उपाय है।
कच्छ में अब तक 44 हजार से ज्यादा किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनायी है। उनका अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती जीरो बजट खेती है। इससे जमीन की उर्वरकता बढ़ती है और पानी का उपयोग भी कम होता है। साथ ही, समय के साथ ही उत्पादन भी बढ़ता है। उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार रासायनिक खेती और जैविक खेती का त्याग करके पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती की महिमा का वर्णन किया।
राज्यपाल ने इस अवसर पर प्राकृतिक खेती में उपयोग किए जाने वाले जीवामृत, घनजीवामृत, निमास्त्र आदि की जानकारी देते हुए गौ पालन का महत्व समझाया। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती को फलदायी बनाने के लिए आवश्यक पांच आयामों का अनुसरण कर खेती करने की अपील की। जमीन को उत्पादक तथा उसमें सूक्ष्मजीवों का प्रमाण बढ़ाने के लिए प्राकृतिक अपनाकर जानलेवा नहीं बल्कि जीवनदाता बनने का किसानों से अनुरोध किया।
वर्तमान समय में रासायनिक खाद के बढ़ते जा रहे प्रमाण के साथ कैंसर जैसे रोगों में भी उछाल आया है। ऐसे में यहां उपस्थित महिला किसानों को राज्यपाल ने प्राकृतिक खेती का संकल्प दिलाया। उन्होंने सभी से अनुरोध किया कि वह प्राकृतिक खेती की जानकारी प्राप्त करने के लिए प्राकृतिक कृषि मॉडल फार्म की मुलाकात लेकर प्रेरणा और जानकारी अवश्य हासिल करें।
इस प्राकृतिक कृषि परिसंवाद में भुज तहसील पंचायत प्रमुख विनोदभाई वरसाणी, आत्मा के डायरेक्टर पी.एस. रबारी, जिला विकास अधिकारी एसके. प्रजापति, अतिरिक्त कलक्टर मितेश पंड्या, आत्मा के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पीके. तलाटी, संबंधित सरकारी विभाग के अधिकारी, कर्मचारी तथा भारी तादाद में महिला किसान, योग शिक्षक, शाला शिक्षक तथा सखीमंडल की बहनें उपस्थित रही। समग्र कार्यक्रम का संचालन मनन ठक्कर ने किया।
रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाएं
