झांसी : उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज के छात्रावास में लगभग 23 महीने पहले दिन दहाड़े एक नाबालिग छात्रा के साथ हुए गैंगरेप मामले के आठ दोषियों को अदालत ने सोमवार को आजीवन कारावास की सजा सुनायी।
अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील विजय सिंह ने अदालत में पैरवी की । उन्होंने बताया कि जिला एवं सत्र न्यायालय में न्यायाधीश संख्या 09 ने मात्र छह माह में मामले की सुनवायी पूरी करते हुए दोषियों को सजा सुनायी।
पॉलीटेक्निक कॉलेज छात्रावास में 10 अक्टूबर 2020 को दिन दहाड़े नाबालिग छात्रा से गैंगरेप , लूटपाट मारपीट करने के आरोप में , भरत निवासी महोबा, धर्मेंद्र सेन निवासी रानीपुर , मोनू पार्या निवासी रानीपुर , शैलेंद्र नाथ पाठक निवासी गोंडा , मयंक शिवहरे निवासी टहरौली , संजय कुशवाह निवासी महोबा , विपिन निवासी प्रयागराज और महोबा निवासी रोहित को जिला कारागार में रखा गया था।
सभी आरोपियों को पुलिस सुरक्षा में आज दोपहर न्यायालय में पेश किया गया। जहां बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि सभी आरोपी पढ़ने वाले छात्र हैं और उनके खिलाफ पूर्व में कोई अपराध दर्ज नही है। वही अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे श्री सिंह ने पीड़िता का पक्ष रखते हुए बताया कि नाबालिग छात्रा से गैंगरेप एक जघन्य अपराध है , जो माफी और सजा कम करने लायक नही है।
सुनवाई कर रहे अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या 09 ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी पक्ष की दलील को खारिज करते हुए सभी आठों को दोषी करार दिया और गैंगरेप तथा पोक्सो एक्ट में आजीवन कारावास की सजा सुना दी। न्यायालय ने माना कि आरोपियों ने जो जघन्य अपराध किया वह माफी लायक नही है। यह भी स्वीकार किया कि अगर घटना के समय पुलिस समय पर नहीं पहुंचती तो और भी बड़ी घटना हो सकती थी ।
गौरतलब है कि लगभग दो वर्ष पहले 10 अक्टूबर 2020 को दिन के समय पॉलीटेक्निक कॉलेज में नाबालिग छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के इस सनसनीखेज मामले से हडकंप मच गया था। जानकारी मिलते ही तत्कालीन पुलिस एवं जिला प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई की थी । आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए बनायी गयी टीमों ने 24 घंटे में सभी आराेपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ रासुका की कार्रवाई भी की थी।
यह घटना निर्भया कांड से बड़ी घटना बन सकती थी यदि समय रहते एसआई विक्रांत न पहुंचा होता। आरोपियों के पक्ष ने अपने बचाव में हाई कोर्ट में भी अपील की थी लेकिन घटना जघन्य होने के कारण उन्हें कोई राहत नहीं मिली। अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या 9 में छह माह में ही सुनवाई करते हुए फैसला सुना दिया ।अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील ने ठोस पैरवी की और पीड़िता को 23 माह बाद इंसाफ मिला। इस पूरे घटना क्रम को निर्भया कांड से बड़ा होने से बचाने में झांसी पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात एस आई विक्रांत की तत्परता की न्यायालय ने भी प्रशंसा की। न्यायालय में 33 गवाह गुजरे और सभी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए अडिग रहे ।
