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लिंगायत शीर्ष स्थान से बेदखल हो जाएंगे

जाति सर्वेक्षण पर कांग्रेस

बेंगलुरु : सिद्दारमैया के जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट को स्वीकार करने पर अड़े रहने के विपरीत वरिष्ठ कांग्रेस नेता शमनूर शिवशंकरप्पा ने रविवार को संकेत दिया कि अगर इसे सार्वजनिक किया गया तो लिंगायत अब राज्य में सबसे बड़ा समुदाय नहीं रहेगा। शिवशंकरप्पा ने आरोप लगाया कि सर्वेक्षण दोषपूर्ण पद्धति अपनाकर किया गया है और इसे वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर नये सिरे से कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “डेटा वीरशैव लिंगायत की उप-जातियों जैसे सदर, बनजिगा, नोनाबा और अन्य के आधार पर संकलित किया गया है, इसलिए इस सर्वेक्षण में हमारी संख्या घट जाएगी।”
राज्य में लिंगायत निकाय के प्रमुख श्री शिवशंकरप्पा ने आरोप लगाया कि सर्वेक्षण से पता चला है कि वीरशैव लिंगायतों की आबादी लगभग 60-70 लाख है। हालांकि उन्होंने कहा कि समुदाय जाति सर्वेक्षण के खिलाफ नहीं है। डीके शिवकुमार ने भी सर्वेक्षण का विरोध किया और वह इसके निष्कर्षों के खिलाफ वोक्कालिंगा नेताओं की एक याचिका पर हस्ताक्षर करने वालों में से एक थे।
चूंकि सिद्दारमैया पर पार्टी के भीतर से दबाव बढ़ रहा है और वह इस बात पर कायम हैं कि रिपोर्ट स्वीकार की जाएगी। साथ ही सरकार ने कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल दो महीने के लिए बढ़ा दिया है। अध्यक्ष जयप्रकाश हेगड़े का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो गया है।
सरकार ने पहले कहा था कि रिपोर्ट नवंबर में कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के रूप में जयप्रकाश हेगड़े के कार्यकाल के अंत तक स्वीकार कर ली जाएगी। फिलहाल हेगड़े का कार्यकाल दो महीने के लिए बढ़ा दिया गया है क्योंकि उनका कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो गया था। केएससीबीसी द्वारा 2017 में सर्वेक्षण पूरा किया गया था, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनावों के पहले राजनीतिक नतीजों पर प्रभाव के चलते इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।

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