
कथा- वाचन करते हुए श्री सद्गुरुनाथ

श्रीमती एवं श्री अजय प्रकाश श्रीवास्तव
नोएडा। फाल्गुन मास के पावन माह में श्री शिव महापुराण कथा के समापन के अवसर पर कथा सुनाते हुए श्री सद्गुरुनाथ जी ने कहा कि आज का दिन व समय अलौकिक है। संकल्प की पूर्णता का विधान पराशक्ति करती है, इसलिये जो चाहो मिलेगा ; बस, अपने को थकने मत देना। राग, द्वेष, वैमनस्य, अपमान , हिंसा आदि को छोड़कर मनुष्य बन सकते हैं। शरीर के स्वस्थ रहते मनुष्य को मोक्ष और ज्ञान की प्राप्ति के लिए प्रयास करना चाहिए। मनुष्य माया के जाल में फँस जाता है तथा लालच के वशीभूत होकर ज्ञान की प्राप्ति नहीं करता। इस कारण मोक्ष की प्राप्ति सम्भव नहीं हो पाती। वस्तु, व्यक्ति, परिस्थिति और स्थान आदि से मोह या लगाव दु:खों व असफलताओं का हेतु बन जाता है। इसलिए मोह को छोड़ आनंद और सफलता की ओर बढ़ें। भक्ति, ध्यान और साधना ज़रूरी है। मनुष्य को धन संग्रह करने से पहले इसका ध्यान रखना चाहिए कि धन अर्जित करने के लिए हमेशा सही मार्ग अपनाएं और मेहनत से धन कमाएं। अर्जित धन का पहला भाग, उपभोग के लिए, दूसरा भाग , धर्म-कर्म के लिए तथा तीसरा भाग , भविष्य के लिए संचित करें। महर्षि नगर, नोयडा के रामलीला मैदान में पिछले 29 फरवरी से 8 मार्च तक आध्यात्मिक चिंतक सद्गुरुनाथ जी के सान्निध्य में यह आयोजन भक्तिमय ढंग से संपन्न हुआ। कथा- स्थल शिवमय दृष्टिगोचर हुआ। श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन करवाने के लिए सद्गुरुनाथ जी ने आयोजकों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि आप लोगों के अथक प्रयास से ही इतने भव्य तरीके से कथा संपन्न हो सका। भक्तों ने भी श्री शिव महापुराण कथा के लिए आयोजन समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों को बहुत-बहुत साधुवाद देते हुए कहा कि सचमुच ऐसा लग रहा है कि हम लोगों के सामने श्री शिव जी विद्यमान हैं। श्री शिव महापुराण कथा के पावन अवसर पर श्री अजय प्रकाश श्रीवास्तव, अध्यक्ष, महर्षि महेश योगी संस्थान और कुलाधिपति, महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फार्मेशन टेक्नालोजी, श्रीमती निशि श्रीवास्तव, श्री राहुल भारद्वाज, उपाध्यक्ष, महर्षि महेश योगी संस्थान और श्री शिव महापुराण कथा कार्यक्रम के संयोजक रामेन्द्र सचान , गिरीश अग्निहोत्री, नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय के प्रोफेसर , सम्पादक व लेखक आचार्य रवीन्द्र नाथ श्रीवास्तव ‘परिचय दास’ , श्री शिव पुराणमहा कथा के मुख्य यजमान श्री एस. पी. गर्ग , श्री श्रेष्ठ वशिष्ठ सहित सहस्र श्रोता उपस्थित थे।
