चेन्नई : तमिलनाडु की राजधानी में स्थित मद्रास विश्वविद्यालय ने गुजरात दंगों पर बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग पर शुक्रवार को रोक लगा दी। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ताओं ने मद्रास विश्वविद्यालय के शताब्दी हॉल में आज तीन बजे इसकी स्क्रीनिंग करने की योजना बनाई थी। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने तय समय स्क्रीनिंग पर रोक लगा दी है। हालांकि रिपोर्टों में कहा गया है कि उनमें से कुछ ने इसे अपने लैपटॉप और मोबाइल फोन में डाउनलोड करके देखा।
एसएफआई के कुछ सदस्यों ने जब प्रतिबंध की अवहेलना करने की कोशिश की तो उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
केरल और दिल्ली के जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) में स्क्रीनिंग किए जाने के बाद एसएफआई यहां इसकी स्क्रीनिंग करने की योजना बनायी थी। केंद्र सरकार ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ नामक वृत्तचित्र के लिंक को ब्लॉक करने का निर्देश दिया था। विदेश मामलों के मंत्रालय ने इसे एक ‘प्रचार का हथकंडा’ कहकर खारिज कर दिया था, जिसमें निष्पक्षता और कमी है और औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है।
गौरतलब है कि जेएनयू में मंगलवार को स्क्रीनिंग को लेकर विरोध देखा गया। इस बीच, माकपा की तमिलनाडु इकाई के सचिव के बालाकृष्णन ने छात्रों को रोकने के लिए राज्य पुलिस और विश्वविद्यालय प्राधिकरणकी निंदा की है। उन्होंने कहा कि गुजरात दंगों पर बीबीसी की दो भागों वाली डॉक्यूमेंट्री दिखाने से इनकार करना मौलिक अधिकार का हनन है ।
मद्रास विवि ने बीबीसी के वृत्तचित्र प्रदर्शन पर लगाई रोक
