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मणिपुर हिंसा : कई संगठनों ने किया विरोध प्रदर्शन

शिमला : मणिपुर में जारी हिंसा को रोकने और शांति एवं सांप्रदायिक सद्भाव की बहाली के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप करने की मांग को लेकर कई सामाजिक और नागरिक समाज संगठनों ने यहां उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया। जनवादी महिला समिति, भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू), हिमाचल किसान सभा,स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (डीवाईएफआई), दलित शोषण मुक्ति मंच और युवा महिला ईसाई एसोसिएशन सहित प्रदर्शनकारी संगठनों ने भी पूर्वाेत्तर राज्य में हिंसा, बलात्कार तथा सामूहिक हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों विशेषकर महिलाओं ने भाग लिया और शिमला के उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व विधायक राकेश सिंघा,अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एआईडीडब्ल्यूए) महासचिव फालमा चौहान, सीटू के महासचिव विजेंद्र मेहरा, जगत राम, सत्यवान पुंडीर, रितु शर्मा, सरिता ठाकुर और बालक राम ने संबोधित किया।
श्री सिंघा ने कहा कि पिछले 86 दिनों से मणिपुर में बेलगाम हिंसा जारी है। हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान चली गई है और 70,000 लोग बेघर हो गए हैं। उन्होंने कहा,“ये सभी लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहे हैं और स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं और लड़कियों के साथ यौन शोषण और बलात्कार की घटनाएं आम हो गई हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर दिया गया, जिसका वीडियो वायरल होने से देश और सभ्य समाज शर्मसार हुआ।
श्री सिंघा ने मणिपुर की भाजपा सरकार पर लगातार ऐसी घटनाओं को छिपाने की कोशिश करने और दोषियों को मौन समर्थन देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात है कि देश के प्रधानमंत्री हिंसा और बलात्कार की ऐसी घटनाओं पर तीन महीने तक चुप रहे। उन्होंने कहा,“जब दो महिलाओं को नग्न घुमाने का वीडियो वायरल हुआ तो प्रधानमंत्री ने मीडिया को संबोधित करते हुए असंवेदनशीलता दिखाई और राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ का मुद्दा उठाकर पूरे मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश की।”
प्रदर्शनकारियों ने श्री मोदी के बयान को ‘पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना’ बताया और आरोप लगाया कि उन्होंने देश में बलात्कार, सामूहिक हत्याओं तथा हिंसा की घटनाओं जैसे संवेदनशील मुद्दों को ‘राजनीति का शिकार’ बना दिया। उन्होंने कहा कि मणिपुर हिंसा में राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह, प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का शासन ‘संदेह’ के दायरे में आ गया है।
प्रदर्शन में भाग लेने वालों में माकपा के राज्य सचिव ओंकार शाद, हिमाचल प्रदेश किसान सभा के अध्यक्ष कुलदीप तंवर, शिमला के पूर्व मेयर संजय चौहान और युवा महिला ईसाई एसोसिएशन की अध्यक्ष विधुप्रिया चक्रवर्ती शामिल थीं।

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