23 साल पहले यहां था श्री राम के नाना-नानी का घर
भोपाल : (पीएमए) अयोध्या में बने भगवान राम के भव्य राम मंदिर का उद्घाटन समय, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का समय नजदीक है, तैयारियां जोरों पर हैं। इस अवसर देश-दुनिया से लोग बेताब हैं। देशभर के राज्यों में रामलला को उपहार देने की होड़ सी लगी है। कोई राज्य दुनिया का सबसे बड़ा घंटा यहां उपहार देगा तो कोई सबसे बड़ी अगरबत्ती। वहीं उनके ननिहाल और ससुराल से भी कई उपहार अयोध्या भेजे जाएंगे। लेकिन क्या आपको पता है भगवान रामलला का ननिहाल कहां है…आपको बता दें कि 23 साल पहले एमपी के इस शहर में था रामलला के नाना-नानी का घर…
दरअसल दिसंबर खत्म होने को है और अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन की तैयारियां जोरों पर हैं। भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में हर कोई सहयोग करना चाहता है फिर चाहे किसी भी तरह करना पड़े। ऐसे में रामलला का ननिहाल और ससुराल पक्ष कैसे पीछे रह सकता था। देशभर से जहां कुछ न कुछ सामान अयोध्या भेजा जा रहा है। वैसे ही उनके ननिहाल से 3 हजार क्विंटल चावल अयोध्या भेजे जाएंगे। ये अब तक की सबसे बड़ी चावल की खेप होगी, जो अयोध्या पहुंचेगी।
23 साल पहले यहां था रामलला का ननिहाल
मप्र का ‘दक्षिण कोशल’। नाम तो आपने सुना ही होगा। दक्षिण कोशल का इतिहास पौराणिक काल में पहुंचा देता है। पौराणिक काल का कौशल प्रदेश, कालांतर में उत्तर कोशल और दक्षिण कोशल में बंट गया था। यह दोनों ही भाग सन 2000 तक मध्यप्रदेश का ही हिस्सा थे। इस क्षेत्र की महानदी (जिसका नाम उस पौराणिक काल में चित्रोत्पला था) का मत्स्य पुराण, महाभारत के भीष्म पर्व तथा ब्रह्म पुराण के भारतवर्ष वर्णन प्रकरण में उल्लेख मिलता है। लेकिन 1 नवंबर 2000 को रामलला का ये ननिहाल छत्तीसगढ़ के नाम से स्थापित हो गया। दरअसल मध्यप्रदेश से अलग होने के बाद यहां स्थित छत्तीस गढ़ों को देखते हुए इसका अस्तित्व छत्तीस गढ़ नाम से ही हुआ। और वाल्मीकि रामायण में भी छत्तीसगढ़ के बीहड़ वनों तथा महानदी का स्पष्ट विवरण मिलता है। यहां स्थित सिहावा पर्वत के आश्रम में निवास करने वाले श्रृंगी ऋषि ने ही अयोध्या में राजा दशरथ के यहां पुत्र्येष्टि यज्ञ करवाया था, जिससे तीनों भाइयों सहित भगवान श्री राम का पृथ्वी पर अवतार हुआ। राम के काल में यहां के वनों में ऋषि-मुनि-तपस्वी आश्रम बना कर निवास करते थे और अपने वनवास की अवधि में राम यहाँ आए थे।
ससुराल से पहुंचेंगे ये उपहार
अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन अवसर पर उनके ससुराल नेपाल के जनकपुर से कपड़े, फल और मेवा के साथ-साथ उपहारों से सजे 1100 थाल भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा भारत के अलग-अलग राज्यों से बहुत सारा सामान अयोध्या पहुंचाया जाएगा…
यहां जाने कौन सा राज्य दे रहा क्या उपहार
- राम लला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होने जा रही है। इसके बाद भगवान को विशेष भोग लगाया जाएगा, इस भोग में स्पेशली उनके ननिहाल से पहुंचे चावल और ससुराल से भेजी गई मेवा सामग्री शामिल की जाएगी।
- भगवान राम की ससुराल नेपाल के जनकपुर से वस्त्र, फल और मेवा 5 जनवरी को अयोध्या पहुंचेंगे। इसके अलावा उपहारों से सजे 1100 थाल भी होंगे।
- नेपाल से आभूषण, बर्तन, कपड़े और मिठाइयों के अलावा भार भी आएगा, जिसमें 51 प्रकार की मिठाइयां, दही, मक्खन और चांदी के बर्तन शामिल होंगे।
- उत्तर प्रदेश के एटा जिले से रामलला के दरबार में अष्टधातु का 2100 किलो का घंटा पहुंचेगा। दावा किया जा रहा है कि यह देश का सबसे बड़ा घंटा होगा, जिसकी लागत 25 लाख रुपए है। इसे 400 कर्मचारी एक साल से तैयार कर रहे हैं। इसकी चौड़ाई 15 फुट और अंदर की चौड़ाई 5 फुट है।
- राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भगवान की चरण पादुकाएं भी वहां पर रखी जाएंगी। फिलहाल, ये पादुकाएं देशभर में घुमाई जा रही हैं। पादुकाएं 19 जनवरी को अयोध्या पहुंचेंगी। इन्हें हैदराबाद के श्रीचल्ला श्रीनिवास शास्त्री ने तैयार किया है।
- श्रीचल्ला श्रीनिवास शास्त्री ने इन श्रीराम पादुकाओं के साथ अयोध्या की 41 दिनों की परिक्रमा की थी। इसके बाद इन पादुकाओं को रामेश्वरम से बद्रीनाथ तक सभी प्रसिद्ध मंदिरों में ले जाया जा रहा है और विशेष पूजा की जा रही है।
- प्राण प्रतिष्ठा के लिए गुजरात के वडोदरा से 108 फीट लंबी अगरबत्ती अयोध्या भेजी जा रही है, जो बनकर तैयार हैं। इसे पंचगव्य और हवन सामग्री के साथ गाय के गोबर से बनाया गया है। इसका वजन 3500 किलो है। वडोदरा से अयोध्या पहुंच रही इस अगरबत्ती की लागत पांच लाख से ज्यादा है। इसे बनाने में 6 महीने लगे हैं। इस अगरबत्ती को 110 फीट लंबे रथ में भेजा जाएगा। अगरबत्ती बनाने वाले विहा भरवाड़ के मुताबिक एक बार जलाने पर यह डेढ़ महीने तक लगातार जली रह सकती है।
वहीं सूरत में राम मंदिर की थीम पर हीरे का हार
वहीं सूरत में राम मंदिर की थीम पर हीरे का हार बनाया गया है। इस पूरे डिजाइन में 5000 अमेरिकी हीरों का इस्तेमाल किया गया है। यह 2 किलो चांदी से बना है, 40 कारीगरों ने 35 दिनों में इस डिजाइन को पूरा किया है। हीरा व्यापारी का कहना है कि, ‘यह किसी व्यावसायिक उद्देश्य के लिए तैयार नहीं किया गया है। हम इसे राम मंदिर को उपहार देना चाहते हैं।’
विदेशों से भी मिल रहा है चंदा
विदेशों से मिलने वाले चंदे को लेकर स्वामी गोविंद गिरि ने कहा कि ‘विदेशों से धन आने के लिए एफसीआरए की अनुमति आवश्यक है। हम इस पर कोई अपवाद नहीं बनना चाहते थे। ट्रस्ट के तीन साल होने के बाद हमने भी एक आवेदन दायर किया, जिसके बाद एफसीआरए से प्रमाण पत्र प्राप्त किया और अब उसके अनुसार हमें विदेशों से भी धन मिलना शुरू हो गया है। विदेशों से अभी कितना पैसा आया है, ये अभी नहीं बताया जा सकता।’
ये प्रमुख लोग हैं आमंत्रित
प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का पूजन 16 जनवरी से शुरू हो जाएगा। इस अदभुत कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री, सेना के अधिकारी, एलएण्डटी, टाटा, अंबानी, अडानी समूह के शीर्ष लोगों को भी बुलाया गया है। कार्यक्रम में कई अन्य देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। सभी परम्पराओं के साधु-सन्त के साथ ही किसी भी क्षेत्र में देश का सम्मान बढ़ाने वाले सभी प्रमुख लोगों को आमंत्रित किया गया है।
ऐसी रहेगी सुरक्षा व्यवस्था
सुरक्षा व्यवस्था पर अयोध्या रेंज IG प्रवीण कुमार ने कहा, “अयोध्या में हमेशा सुरक्षा व्यवस्था पुख़्ता रहती है, इसमें CRPF, UPSSF, PSE और सिविल पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था रहती है। नई सिक्योरिटी प्लान के तहत आवाजाही करने वाले व्यक्ति को सिक्योरिटी चेकअप से गुजरना होगा, CCTV कैमरे रहेंगे, बिना अनुमति के ड्रोन उड़ते हैं तो कार्रवाई होगी। नदी तट के माध्यम से भी सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। 37 पार्किंग स्थल को केंद्र किया गया है वहां तैयारी की गई है।
