मथुरा : उत्तर प्रदेश में मथुरा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय संतोष कुमार तृतीय की अदालत ने लगभग पांच वर्ष पूर्व की गई एक वकील की हत्या के पांच दोषियों को आजीवन कठोर कारावास देने के साथ साथ अर्थदंड की सजा सुनायी है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता भीष्म दत्त सिंह तोमर ने बताया कि न्यायाधीश ने जहां चार अभियुक्तों नन्दलाल ,फन्नू उर्फ वीरेन्द्र , रिंकू तथा रूपा को में से प्रत्येक पर 17-17 हजार का जुर्माना लगया है वहीं पांचवे अभियुक्त गोविन्दा पर 18 हजार का जुर्माना इसलिए लगाया है क्योंकि उसके पास से हत्या में प्रयोग किया गया, तमंचा बरामद हुआ था ।
उसकी हाईकोर्ट से भी जमानत नही हुई और वह गिरफ्तारी के बाद से अभी तक जेल में बन्द है। जुर्माना न अदा करने पर आरोपियों को एक एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी किंतु सभी सजाएं साथ साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार 26 अक्टूबर 2017 को रात साढ़े नौ बजे नन्दलाल एव फन्नू उर्फ वीरेन्द्र पुत्रगण देवी सिंह,गोविन्दा पुत्र शरण, रिंकू पुत्र राम तथा रूपा पुत्र सुक्खीराम निवासीगण राजपुर थाना वृन्दावन ने एक राय होकर उस समय अधाधुंध गोली चलाना शुरू कर दिया जब अधिवक्ता रामगोपाल सिंह एडवोकेट अपने बेटे के साथ कोतवाली वृन्दावन के अन्तर्गत रामनगर कालोनी में घर के बाहर टहल रहे थे।
गोली लगने से जहां अधिवक्ता सिंह घायल हो गए वहीं उनके साथ टहल रहा उनका बेटा इसलिए बच गया कि वह गोलीबारी के दौरान जमीन पर लेट गया था। गोली की आवाज सुनकर आसपास के लोग आ गए तो हमलावर गोली चलाते हुए , धमकी देते हुए वहां से भाग गए। घायल अधिवक्ता को नयति अस्पताल ले जाया गया जहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया ।
घटना की रिपोर्ट मृत अधिवक्ता के बेटे हेमन्त सिंह ने लिखाई थी और मुकदमा धारा 147, 148, 149, 302, 307, 506 एवं 302(34) आईपीसी में दर्ज किया गया था।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता के अनुसार मृत अधिवक्ता हमलावरों के साथ जमीनों के खरीदने बेचने का व्यापार करते थे तथा मृत अधिवक्ता भी पहले राजपुर में रहते थे। उनमें आपस में बाद में विवाद हो गया था। सरकारी वकील ने बताया कि उन्होंने दस गवाह इस मामले में पेश किये थे जो घटना सच होने की गवाही दे रहे थे। उनका कहना था कि इसके बावजूद अभियुक्तों ने पहले अपने को निर्देाष बताते हुए कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है किंतु अदालत में जिरह के दौरान एवं गवाहों के बयान,डाक्टरी रिपोर्ट आदि के आधार पर उनका दोष सिद्ध हो गया ।
उन्होंने बताया कि सजा के मामले में जहां बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि अभियुक्तों के छोटे छोटे बच्चे हैं इसलिए कम सजा दी जाय वही जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता तोमर ने कहा कि अभियुक्तों ने जघन्य अपराध किया है इसलिए उन्हें सख्त सजा दी जानी चाहिए।
