हैदराबाद : तेलंगाना के औषधि नियंत्रण प्रशासन (डीसीए) के अधिकारियों ने बाजार में कुछ दवाओं का पता लगाया है, जिनके लेबल पर दावे किए गए हैं कि वे ‘गुर्दे की पथरी’ और ‘गठिया’ का इलाज करती हैं। ये दावे ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 का उल्लंघन करते हैं। यह अधिनियम विशिष्ट रोगों और विकारों के उपचार के लिए कतिपय औषधों के विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाता है। अधिनियम के अनुसार, कोई भी व्यक्ति सूचीबद्ध बीमारियों या विकारों के बारे में विज्ञापनों का प्रकाशन नहीं कर सकता।
भ्रामक और आपत्तिजनक विज्ञापनों वाली दवाओं की पहचान करने के लिए 25 मई को चलाए गए एक विशेष अभियान में डीसीए के अधिकारियों ने उत्पादों का पता लगाया। रयूम लिनिमेंट नामक एक आयुर्वेदिक दवा जिस पर एक भ्रामक लेबल पाया गया जिसमें दावा किया गया कि यह ‘गठिया’ का इलाज करता है। इसका निर्माण माहेश्वरी फार्मास्यूटिकल्स (आई) लिमिटेड, प्लॉट नंबर 7, सेक्टर 6 बी, आई.आई.ई, हरिद्वार, उत्तराखंड द्वारा किया जाता है। ड्रग्स इंस्पेक्टर ए श्रीलता द्वारा आदिलाबाद में एक मेडिकल दुकान पर छापेमारी के दौरान इस दवा के स्टॉक जब्त किए गए।
गुर्दे की पथरी और गठिया के उपचार के लिए औषिधियों का विज्ञापन औषधी और चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के अंतर्गत निषिद्ध है। एक वक्तव्य में रविवार को कहा गया कि आगे की जांच की जाएगी और सभी अपराधियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। कुछ बीमारियों और विकारों के उपचार के लिए दवाओं के बारे में भ्रामक विज्ञापन करने वाले व्यक्ति इस अधिनियम के तहत दंडनीय हैं, जिसमें छह महीने तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
तेलंगाना में ‘भ्रामक दावे वाली दवाइयां जब्त
