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मानसिक स्वास्थ्य एक सार्वभौमिक मानव अधिकार

नई दिल्ली : मनसुख मांडविया ने मंगलवार को कहा कि आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों ने मानसिक स्वास्थ्य, तंत्रिका संबंधी और मादक द्रव्यों के सेवन विकारों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के एकीकरण की सुविधा प्रदान की है। मांडविया ने यहां विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एक सार्वभौमिक मानव अधिकार है। सरकार को लक्ष्य स्वास्थ्य देखभाल का लाभ देश के सभी नागरिकों को दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने निमहंस में नई सुविधाओं का उद्घाटन किया और टेली-मानस का प्रतीक चिह्न भी जारी किया। इस अवसर पर नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य डॉ. वीके पॉल भी उपस्थित रहे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण वर्ष 2015-16 के अनुसार 10 प्रतिशत आबादी मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से प्रभावित है और इसका असर समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि पिछले साल विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शुरू की गई टेली मानस सेवा ने अब तक 3,50,000 से अधिक लोगों को परामर्श दिया है और वर्तमान में 44 टेली मानस केंद्र से 2000 लोगों को प्रतिदिन परामर्श प्रदान करती है। इस हेल्पलाइन पर प्रतिदिन 1000 से अधिक कॉल आ रही हैं।

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