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मनरेगा ने परंपरागत जलाशयों को जल संरक्षण केन्द्रो के रूप में बनाई पहचान

जोधपुर : राजस्थान में जोधपुर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अन्तर्गत जल संरक्षण गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई है जिससे परंपरागत जलाशयों की गांवाई जल संरक्षण केन्द्रों के रूप में पहचान बनी है। मनरेगा में विकसित होकर निखरे इन जलाशयों में एक है जोधपुर जिले की देचू पंचायत समिति अन्तर्गत कोलू पाबूजी ग्राम पंचायत का पाबूसर तालाब।
इसके तहत इसे मॉडल तालाब बनाने का काम हाथ में लिया गया। इस पर 12.44 लाख रुपए की धनराशि व्यय की गई। इसमें 12.17 लाख रुपए श्रम मद तथा 0.27 लाख रुपए की धनराशि सामग्री मद में व्यय हुई। इस कार्य पर सात हजार 736 मानव दिवस सृजित हुए। इस कार्य ने एक ओर जहाँ जरूरतमन्द ग्रामीणों की रोजगार की आवश्यकता को पूरा कर जीवन निर्वाह का सम्बल प्रदान किया वहीं दूसरी ओर आदर्श तालाब के रूप में विकसित होने के बाद इसका सौन्दर्य निखरने लगा है।
एक लाख 12 हजार घन मीटर जल भराव क्षमता का यह जलाशय आज उपयोगिता और आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। अब इसमें साल भर पानी रहने लगा है जिसका उपयोग ग्रामीणों के साथ-साथ पशु-पक्षियों के लिए भी हो रहा है। आस-पास के कूओं का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। देचू पंचायत समिति के विकास अधिकारी डॉ. पूनमाराम बताते हैं कि पंचायत समिति क्षेत्र में इसी प्रकार के गई जलाशयों को विकसित किया गया है। इससे ग्रामीणों को पानी के मामले में सहूलिय हुई है तथा ग्रामीण परिवेश में हरियाली विस्तार के साथ ही ग्राम्य जनता को खुशहाली का सुकून मिलने लगा है।

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