नयी दिल्ली : देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन इकाई एनटीपीसी लिमिटेड और जीई गैस पावर ने देश में बिजली उत्पादन को डीकार्बनाइज करने के लिए अत्याधुनिक बिजली तकनीक को अपनाने के अपने प्रयासों में एक समझौता किया है। कंपनी ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि यह समझौता गुजरात में एनटीपीसी के कवास कंबाइंड-साइकिल गैस विद्युत संयंत्र में स्थापित जीई के 9ई गैस टर्बाइन्स में प्राकृतिक गैस के साथ मिश्रित हाइड्रोजन (एच2) की को-फायरिंग की संभावना का प्रदर्शन करने के लिए किया गया है, जिसमें दोनों कंपनियां संयुक्त रूप से कवास गैस पावर प्लांट से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने और देश में एनटीपीसी की स्थापित इकाइयों में बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन के तरीके तलाश करेगी।
देश में एनटीपीसी के साथ अपनी तरह के इस पहले समझौते में जीई गैस पावर प्राकृतिक गैस के साथ एच2 के सम्मिश्रण के लिए आवश्यक गैस टरबाइन इकाई और सहायक उपकरणों में संभावित संशोधनों का मूल्यांकन करेगी।
एनटीपीसी लिमिटेड के परियोजना निदेशक उज्ज्वल कांति भट्टाचार्य ने कहा,“ यह समझौता राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के तहत उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों में से एक है। हम अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग करने और एच2 जैसे शून्य-कार्बन ईंधन के उच्च प्रतिशत के साथ अपनी गैस पावर परिसंपत्तियों का लाभ उठाने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, क्योंकि ईंधन की उपलब्धता व्यवहार्य हो जाती है। ”
जीई गैस पावर साउथ एशिया के सीईओ दीपेश नंदा ने कहा,“ भारत का शक्ति परिदृश्य उभरती तकनीकों से मजबूत हुआ है जो विकास और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा के विभिन्न चरणों में हैं। हम हाइड्रोजन में एनटीपीसी के नेतृत्व, प्रतिबद्धता और निवेश की सराहना करते हैं जो आगे चलकर कम लागत वाले हाइड्रोजन उद्योग की खोज और ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के मामले में नये उद्योग मानक स्थापित कर सकता है। ”
एनटीपीसी, जीई गैस पावर के बीच समझौता
