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प्रकृति ही विश्व शांति का आधार है

अहमदाबाद : आचार्य देवव्रत ने शनिवार को यहां कहा कि प्रकृति ही विश्व शांति का आधार है। देवव्रत ने अहमदाबाद में 15वें प्रकृति अंतरराष्ट्रीय डॉक्युमेंटरी फिल्म फेस्टिवल का शुभारम्भ किया। पर्यावरण, विकास, मानव अधिकार और स्वच्छ भारत विषय पर आधारित डॉक्युमेंटरी फिल्मों के फेस्टिवल का शुभारम्भ करवाते हुए उन्होंने कहा कि पृथ्वी, वायु, जल, आकाश और अग्नि, प्रकृति के इन पंचतत्वों से बने हमारे शरीर के स्वास्थ्य पर सीधा असर है। प्रकृति जितनी सुरक्षित, संयमित और नियंत्रित होगी, हमारा शरीर उतना ही स्वस्थ, निरोगी और नियंत्रित होगा। प्रकृति का जतन- संवर्धन करें, प्रकृति ही विश्व शांति का आधार है।
कॉन्सोर्शियम फॉर एज्युकेशनल कम्युनिकेशन (सीइसी), नयी दिल्ली द्वारा गुजरात युनिवर्सिटी के एज्युकेशनल मीडिया रिसर्च सेंटर (ईएमआरसी) के सहयोग से आयोजित 15वां प्रकृति अंतरराष्ट्रीय डॉक्युमेंटरी फिल्म फेस्टिवल गुजरात युनिवर्सिटी के श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऑडिटोरियम में 30 अक्टूबर तक चलेगा। दीप प्रज्जवलित कर शुभारम्भ करने के बाद राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ आह्वान से परम्परागत शिक्षा पद्धति में नये परिमाण जुड़ गए हैं। डिजिटाइजेशन समय की मांग है, ऐसे में सीइसी नयी दिल्ली युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बना है। समग्र भारत में 21 ईएमआरसी के पास 12 क्षेत्रीय भाषाओं में डिजिटल पाठ्यकरम ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
मनुष्य की प्रकृति-स्वभाव सकारात्मक और करुणामय होगा तो धरती पर स्वर्ग की अनुभूति होगी। इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य की प्रकृति-स्वभाव बदलना कठिन है, लेकिन यदि मन-स्वभाव और प्रकृति बदल जाएं, तो धरती की प्रकृति भी बदल जाएगी और उसका जतन-संवर्धन होगा। मनुष्य द्वारा प्रकृति के साथ की गयर छेड़छाड़ का परिणाम ग्लोबल वार्मिंग है। अगर मनुष्य अब भी नहीं सुधरेगा तो गम्भीर परिणाम भुगतने होंगे। प्रकृति एक ईश्वरीय व्यवस्था है। मनुष्य अपनी प्रकृति और स्वभाव से प्रकृति का उत्थान कर सकता है और विनाश भी कर सकता है।

‘सर्वे भवंतु सुखिन:’ की संस्कृति में आस्था रखने वाले हम लोग- समग्र दुनिया सुखी रहे, आनंद में रहे, यह कामना करते हैं। अगर मनुष्य की प्रकृति सकारात्मक और करुणामय होगी, तो इस विश्व में आतंकवाद, खून-खराबे और एटम बम का अस्तित्व ही नहीं होगा। डॉक्युमेंटरी फिल्म के माध्यम से मनुष्य की प्रकृति बदलने के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य की प्रकृति पॉजिटिव हो जाएगी , तो धरती की प्रकृति भी पॉजिटिव हो जाएगी।
शुभारम्भ समारोह में ईएमआरसी अहमदाबाद द्वारा तैयार की गयी प्राकृतिक कृषि विषयक डॉक्युमेंटरी फिल्म की यहां स्क्रीनिंग की गयी। पन्द्रहवें प्रकृति इंटरनेशनल डॉक्युमेंटरी फिल्म फेस्टिवल के शुभारम्भ अवसर पर सीईसी नयी दिल्ली के निदेशक प्रो जगत भूषण नड्ढा ने कहा कि यह फेस्टिवल फिल्म निर्माताओं और युवाओं में पर्यावरण, मानव अधिकार, विकास तथा स्वच्छता से सम्बंधित विभिन्न विषयों को उजागर करने, इनसे सम्बंधित समस्याओं के निराकरण और जनजागृति के लिए फिल्में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सर्वप्रथम 1997 में शुरू हुआ और राष्ट्रीय स्तर तक सीमित यह फिल्म फेस्टिवल आज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा है। इस वर्ष फेस्टिवल के लिए 74 एंट्रियां आई थीं, जिनमें म्यांमार और बंगलादेश जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देश भी शामिल हैं।
गुजरात यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ सुश्री नीरजा गुप्ता ने कहा कि प्रकृति वह है जो हमको बनाती है। प्रकृति के जतन के लिए इस प्रकार के फेस्टिवल का आयोजन बहुत ही उपयोगी है। भारत एक कृषि प्रधान देश है। प्रकृति के साथ जुड़ाव हम सबकी जिम्मेदारी भी है। हम सभी बाह्य प्रकृति की रक्षा नहीं कर सकते, तो हम में एक उदासी आ जाती है। इस तरह हम प्रकृति को मात्र शब्दों में ढालने का प्रयास करेंगे तो प्रकृति विनाश की तरफ ले जाएगी।
स्वागत सम्बोधन में ईएमआरसी अहमदाबाद के प्रभारी निदेशक नरेश दवे ने ईएमआरसी की कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। प्रोग्राम कॉ-ऑर्डिनेटर डॉ सुनील महेडु ने फिल्म फेस्टिवल की प्रस्तावना पेश की। इस अवसर पर फिल्म निर्देशक देश के विभिन्न मीडिया सेंटर के निदेशक, बोर्ड सदस्य, मीडिया में अभ्यासरत विद्यार्थी भारी संख्या में उपस्थित थे।

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