केंद्रपाड़ा : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक नोटिस जारी किया है और बेघरों को मकान आवंटन पर ओडिशा के क्योंझर और कोरापुट के कलेक्टरों से चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है। शीर्ष मानवाधिकार पैनल से हस्तक्षेप की मांग करते हुए मानवाधिकार कार्यकर्ता राधाकांत त्रिपाठी ने कहा कि ओडिशा सरकार की लापरवाही और निष्क्रियता के कारण आजादी के 77 साल बाद भी सैकड़ों गरीब परिवार बिना उचित आश्रय के रह रहे हैं।
आयोग ने ओडिशा में प्रधानमंत्री आवास योजना के संभावित लाभार्थियों के खिलाफ कथित भेदभाव से संबंधित क्योंझर, गंजम और कोरापुट जिलों में 40 मामलों की आभासी सुनवाई की। इस दौरान विकास आयुक्त अनु गर्ग, पंचायती राज एवं पेयजल विभाग के प्रमुख सचिव सुशील कुमार लोहानी, कोरापुट, क्योंझर, गंजम के कलेक्टर और याचिकाकर्ता राधाकांत त्रिपाठी उपस्थित रहे।
आयोग ने गंजम जिले से संबंधित मामलों को तब बंद कर दिया, जब जिला कलेक्टर ने कहा कि लाभार्थियों के पास पक्के मकान हैं। क्योंझर कलेक्टर ने कहा कि 140 घरों से संबंधित मामलों में से 45 को पीएमएवाई के तहत आवंटित किया गया है, 45 प्रतीक्षा सूची में हैं। आयोग ने क्योंझर जिला कलेक्टर को आयोग के अवलोकन के लिए चार सप्ताह के भीतर लाभार्थियों के विवरण और उन्हें दिए गए लाभ का उल्लेख करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
वहीं. कोरापुट कलेक्टर ने कहा कि 18 मामलों में लाभार्थी प्रतीक्षा सूची में हैं। तीन के पास पक्के घर हैं और एक मामले में लाभार्थी ने पीएमएवाई के तहत लाभ का दावा नहीं किया है, दो मामलों में पीएमएवाई में नई प्रविष्टि शुरू होने के बाद लाभार्थियों पर विचार किया जाएगा। एक मामले में लाभार्थी के पास जमीन नहीं है। आयोग ने कोरापुट जिला कलेक्टर को चार सप्ताह के भीतर आयोग को एक अद्यतन तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
एनएचआरसी ने बेघरों को मकान आवंटन पर अद्यतन रिपोर्ट मांगी
