ग्रेटर नोएडा : दिल्ली एनसीआर के जेबर में 70 करोड़ डॉलर की लागत से बन रहे नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के वर्ष 2024 के अंत तक शुरू करने की घोषणा करते हुये इसको बना रही कंपनी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने आज कहा कि इसके निर्माण में उत्तर प्रदेश के समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का समिश्रण देखने को मिलेगा।
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्रेलमैन और मुख्य परिचालन अधिकारी किरण जैन ने यहां संवाददाताओं से चर्चा में यह घोषणा करते हुये कहा कि नोएडा अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट 2024 के अंत तक दिल्ली एनसीआर की हवाई यात्री परिचालन क्षमता में प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों की बढ़ोत्तरी कर देगा। श्री श्रेलमैन ने कहा कि टाटा प्रोजेक्टस इसके निर्माण का काम शुरू कर दिया है और अभी एक हजार से अधिक श्रमिक काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस हवाई अड्डे का पहला चरण 2024 के अंत तक पूरा हो जायेगा।
अभी यह 1300 हेक्टेयर में बन रहा है लेकिन जब इस हवाई अड्डा का चौथा चरण पूर्ण होगा तब इसकी वार्षिक क्षमता सात करोड़ यात्री होगी। जब पहले चरण की क्षमता का 80 प्रतिशत उपयोग होने लगेगा तब दूसरे चरण का निर्माण शुरू होगा और आगे भी इसी तरह से विभिन्न चरणों का निर्माण किया जायेगा। उनकी कंपनी का 40 वर्ष के लिए यह हवाई अड्डा मिला है। पहले चरण में एक रनवे और एक टर्मिनल का निर्माण किया जायेगा। अंतिम चरण पूरा हो जाने के बाद इस एयरपोर्ट के दो टर्मिनल और दो रनवे होंगे, जो हर साल 7 कराेड़ यात्रियों को संभालेंगे।
सुश्री जैन ने कहा कि इसके निर्माण में बनारस के घाटो से लेकर उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों पर आधारित निर्माण पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही यात्रा को सुगम बनाने के लिए डिजिटल टेक्नालॉजी पर बल दिया जा रहा है ताकि विमान के परिचालन और यात्रियों का हवाई अड्डे पर लगने वाले समय में कमी लायी जा सके। इस एयरपोर्ट के डिज़ाइन की प्रेरणा भारत से ली गई है और इस क्षेत्र के वास्तुकला से प्रेरित अनेक तत्वों को इसमें शामिल किया गया है।
इस टर्मिनल के बाहरी कोर्ट की सीढ़ियाँ वाराणसी और हरिद्वार के मशहूर घाटों से प्रेरित हैं, जो लोगों का स्वागत कर उन्हें एक साथ लाती हैं। हवेली का रूप व अहसास प्रदान करते हुए कोर्टयार्ड से ताजा हवा और धूप टर्मिनल के भवन में प्रवेश करेगी। क्षेत्र की महत्वपूर्ण नदियों से प्रेरित, सफेद, ट्रांसलुसेंट,और लहरदार छत बहती नदी का प्रभाव उत्पन्न करेगी। यात्री टर्मिनल में बारीक कला से बनी जालीदार स्क्रीन हैं, जो भारतीय वास्तुकला से प्रेरित हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश राज्य में एक भव्य प्रवेश का प्रदर्शन करेगा।
उन्होंने कहा कि यात्रियों के आवागमन के लिए इन टर्मिनल को आपस में जोड़ा जाएगा, पैदल चलने की दूरी और पर्यावरण पर प्रभाव को कम किया जाएगा। इसके अलावा, मॉड्युलर डेवलपमेंट प्लान द्वारा निर्माण के दौरान कार्यों पर प्रभाव को कम किया जाएगा। इंटर-टर्मिनल कनेक्टर हवाई जहाज और उनके परिचालन का लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। पहले रनवे की लंबाई 3900 मीटर होगी।
दूसरे रनवे की लंबाई भी 3900 मीटर होगी जबकि तीस रनवे 4150 मीटर लंबा होगा। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट से यात्रियों के सुगम व कॉन्टैक्टलेस आवागमन के लिए अत्याधुनिक टेक्नॉलॉजी के क्रियान्वयन के साथ डिजिटल एयरपोर्ट के रूप में नए मानक स्थापित करेगा। इसमें इंटीग्रेटेड सिस्टम्स और सेवाओं द्वारा मदद मिलेगी, जिसमें भारतीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की डिजी यात्रा पॉलिसी के अनुरूप् इनडोर नैविगेशन, पैसेंजर फ्लो मैनेजमेंट, एवं स्मार्टफोंस द्वारा चेक-इन बैगेज ड्रॉप, और सभी चेकप्वाईंट्स पर डिजिटल प्रोसेसिंग जैस टेक्नॉलॉजीज़ का इस्तेमाल शामिल है।
उन्होंने कहा कि यह उत्तर भारत का मुख्य एयर कार्गो गेटवे बन जाएगा। यह एयरपोर्ट एक परिवेश का विकास करेगा, जिसमें अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रोडक्ट होंगे, जो सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं द्वारा समर्थित होंगे, जिसमें स्विस एफिशियंसी, सहजता व क्वालिटी शामिल है। इसमें इंटीग्रेटेड मल्टीमोडल कार्गो हब उत्तर प्रदेश को विश्व में लॉजिस्टिक्स के नक्शे पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस एयरपोर्ट में लचीले, मॉड्युलर और किफायती कार्गो एवं लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ निर्माण केंद्रों से तीव्र, सुविधाजनक और इंटरमोडल कनेक्टिविटी होगी।
