नई दिल्ली। अपनी मांगों को लेकर जंतर मंतर पर 100 दिवसीय धरने पर बैठे नरेगा मजदूरों का आज 41वां दिन है। संघर्ष की राह पर बैठे मजदूरों के लिए कल का दिन जीत की सौगात लेकर आया था। ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ हुई वार्ता में सचिव ने ये आश्वासन दिया कि आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) को बाध्यकारी बनाने की समय सीमा कुछ महीनों के लिए आगे बढ़ा दी है। साथ ही मंत्रालय के सचिव ने इस बात पर सहमति जताई कि आने वाले दिनों में नरेगा से जुड़ी समस्याओं पर प्रतिनिधि मंडल के साथ वार्ता की जाएगी। साथ ही, कल शाम में नरेगा संघर्ष मोर्चा के बैनर तले, पीपुल्स एक्शन फॉर एम्प्लॉयमेंट गारंटी , कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स , जन सरोकार, नेशनल अलायंस ऑफ पीपल्स मूवमेंट्स , राइट टू फूड कैंपेन , इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन , रीथिंक आधार और पीपल फर्स्ट के सहयोग से इंडिया इंटरनेशनल सेंटर पर एक मीटिंग रखी गई थी। इस सभा के लिए वकीलों, न्यायाधीशों और सांसदों को न्यौता दिया था। इस संगोष्ठी का शीर्षक था राज्य बनाम जनता : मनरेगा और लोगों के अधिकारों पर हमला ; इस संगोष्ठी का उद्देश्य न्यायविदों को नरेगा श्रमिकों के मुद्दों से अवगत कराना, उन तरीकों का पता लगाना जिससे कानून जानने वाली बिरादरी श्रमिकों का साथ दे सके। इस विचार-गोष्ठी को कई वक्ताओं ने संबोधित किया; जिसमें लोक सभा की सदस्य कनिमोझी करुणानिधि ने अपना पूरा समर्थन नरेगा मजदूरों को दिया। साथ ही, उन्होंने वादा किया कि नरेगा जत्थेबंदी को ग्रामीण विकास पर बनी स्थायी समिति की बैठकों में बातचीत के लिए आमंत्रित किया जाएगा। राज्यसभा सांसद मनोज झा ने सभा को संबोधित करते हुए नरेगा मजदूरों के धरने के प्रति समर्थन व्यक्त किया। सांसद झा ने कहा कि वो सड़क से डरते हैं, संसद ने नहीं डरते – केंद्र में बैठी हुकूमत संसद और उसकी प्रक्रियाओं को ज्यादा तवज्जो नहीं देती है पर सड़क पे होने वाले जनता के संघर्ष का असर उन पर पड़ता है। जनता कहीं विपक्ष से तालमेल न बिठा दे, उसका खौफ केंद्र सरकार को सताता रहता है। हमें जनता और संसद के बीच का फासला कम करना होगा। सभा में सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने नरेगा के महत्त्व और सरकार की बाध्यकारी जिम्मेदारी सुनिश्चित करने वाले कानून की ओर ध्यान खींचा। वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि इस सरकार में सिर्फ प्रधानमंत्री की आवाज सुनी जाती है; इसके अलावा अगर किसी की आवाज सुनी जाती है तो वो है जनता की आवाज। धरना स्थल पर आज भी राजस्थान के मजदूरों ने अपनी आवाज बुलंद की। अपनी समस्याओं को रखा— नेटवर्क के कारण कार्य स्थल से तस्वीर नहीं अपलोड कर पाते हैं, मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं किया जाता है, भुगतान के लिए लाई गई आधार आधारित प्रणाली को वापस लिया जाए, एनएमएमएस ऐप को वापस लिया जाए, नरेगा के बजट में बढ़ोतरी की जाए। राजस्थान के मजदूरों का धरना स्थल पर आज आखिरी दिन था। नाच-गान के साथ मोर्चे को मजबूत किया।
