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एनआरआई सभा कोई एनजीओ नही

चंडीगढ़ : पंजाब सरकार ने बुधवार को दावा किया है कि एनआरआई सभा कोई गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) नहीं है।
एनआरआई मिलन कार्यक्रमों पर खर्च एनआरआई सभा के खाते से करने पर सभा के कुछ सदस्यों के कथित रूप से आपत्ति दर्शानेे की खबर मीडिया के एक हिस्से में आने के बाद आज एनआरआई मामलों के प्रधान सचिव जे एम बालागुरुगन नेे बयान जारी कर स्पष्ट किया कि एनआरआई सभा कोई एनजीओ नहीं बल्कि सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत पंजीकृत सोसायटी है। पंजाब सरकार की मंजूरी के साथ उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री इसके मुख्य संरक्षक हैं। जालंधर विभाग के आयुक्त या एनआरआई मामलों के आयुक्त इसके अध्यक्ष हैं और सभी जिला उपायुक्त एनआरआई सभा जिला इकाइयों के अध्यक्ष हैं।
प्रधान सचिव ने कहा कि एनआरआई सभा पंजाब सरकार के तत्वावधान में कार्य करती है और इसका मुख्य उद्देेश्य पंजाब से एनआरआई के हितों की रक्षा व कल्याण है। उन्होंने कहा कि एनआरआई सभा के नियम कानूनों के अनुसार यह प्रदेश सरकार की संस्था के रूप में एनआरआई के कल्याण का कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि ‘एनआरआई पंजाबियां नाल मिलनी‘ कार्यक्रम प्रवासी पंजाबियों की समस्याएं सुलझाने के उद्देश्य से आयोेजित किया जा रहा है, जो कि सभा का भी एक उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि उक्त कार्यकम सरकारी कार्यक्रम ही है और उस पर खर्च किये जा रहे पैसे एनआरआई की समस्याएं सुलझाने पर ही खर्च किये जा रहे हैं। जो लोग खर्च का मुद्दा उठा रहे हैं, उनकी सभा की प्रशासनिक या वित्तीय कार्य में कोई भूमिका नहीं है क्योंकि चुनेे हुए सदस्यों का कार्यकाल इस साल मार्च में समाप्त हो चुका है औैर यदि कोई चुनी हुई इकाई है भी तो इसके अध्यक्ष जालंधर के विभागीय आयुक्त हैं। उन्होंने कहा कि यह भी स्पष्ट किया जाता है कि विभिन्न स्थलों पर व्यवस्था के लिए खर्च पैसेे सरकार की तरफ से एनआरआई सभा के नियम कानून की धरा 18(ए) के तहत मंजूर किये गये हैं और वापस किये जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि सभा के कुछ सदस्यों नेे कार्यक्रम पर सभा के खाते से खर्च करनेे पर इस आधार पर आपत्ति जताई है कि यह पैसे पंजीकृत 23000 एनआरआई से सदस्यता शुल्क के रूप में लेकर जमा किये गये हैं। कार्यक्रम का आयोेजन सरकारी कार्यक्रम के रूप में किया गया है। सदस्यों का यह भी कहना है कि इससे पूर्व एनआरआई के लिए आयोेजित इस तरह के कार्यक्रमों में कभी सभा के खाते से निधि नहीं ली गई और सरकार ही खर्चा उठाती आई है।

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