भुवनेश्वर : ओडिशा विधान सभा में आदिवासी भूमि बिक्री मुद्दे पर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के लगातार दूसरे दिन हंगामे के कारण गुरुवार को अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही शाम चार बजे तक स्थगित कर दी। सदन में विपक्ष दलों के हंगामे के कारण पहले सत्र में आज कोई कामकाज नहीं हो सका। विधानसभा अध्यक्ष प्रमिला मलिक ने आज सदन की कार्यवाही को शाम चार बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। सदन में विपक्षी सदस्य सरकार से आदिवासियों की जमीन गैर-आदिवासियों को बेचने की अनुमति देने के कदम को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे थे।
जैसे ही आज प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू हुयी, भाजपा और कांग्रेस के सदस्य बुधवार की ही तरह सदन के बीचोंबीच आकर नारे लगाने लगे और गैर-आदिवासियों को आदिवासी भूमि खरीदने की अनुमति देने के सरकारी कदम को पूरी तरह वापस लेने की मांग करने लगे। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण हालांकि सदन असमंजस की स्थिति बनी हुई थी लेकिन इस बीच अध्यक्ष ने जल संसाधन मंत्री तुकुनी साहू से एक प्रश्न का उत्तर देने को कहा। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण प्रश्नकाल, शून्यकाल की कार्यवाही और सदन का अन्य कामकाज नहीं हो सका।
सदन में कल भी भूमि सुधार से संबंधित विधेयक पेश करने के अलावा पूरे दिन कोई कामकाज नहीं हो सका। गत 14 नवंबर को ओडिशा मंत्रिमंडल ने अनुसूचित क्षेत्र अचल संपत्ति हस्तांतरण (अनुसूचित जनजातियों द्वारा) विनियमन, 1956 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी, जिससे आदिवासियों को अनुसूचित क्षेत्रों में गैर-आदिवासियों को भूमि हस्तांतरित करने की अनुमति मिल गई थी।
राजस्व मंत्री सुदाम मारंडी ने 17 नवंबर को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा, “प्रस्तावित संशोधन प्रस्ताव को रोक दिया गया है।”
सदन के बाहर विपक्ष के मुख्य सचेतक मोहन माझी ने कहा कि सरकार द्वारा आदिवासियों की जमीन हड़पने और उन्हें जमीन से वंचित करने की एक बड़ी साजिश रची जा रही है और केवल इस प्रस्ताव के रोकना पर्याप्त नहीं है, इसे पूरी तरह से वापस लिया जाना चाहिये। विपक्षी मुख्य सचेतक ने कहा कि उनकी पार्टी सदन के अंदर और बाहर अपना आंदोलन जारी रखेगी और जरूरत पड़ने पर सड़क पर भी उतरेगी।
