गौरवशाली भारत

देश की उम्मीद ‎‎‎ ‎‎ ‎‎ ‎‎ ‎‎

एक लाख नागरिकों ने यमुना किनारे बनायी मानव श्रृंखला

सभ्यता बचाने के लिए नदियों को बचाना ज़रूरी: अनुपम

नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली के नागरिक रविवार को अपनी जीवनदायनी माँ यमुना के लिए उठ खड़े हुए। यमुना तट पर लगभग एक लाख नागरिकों ने मानव श्रृंखला बनाकर नदी को स्वच्छ और अविरल बनाए जाने की मांग की। उत्तरी दिल्ली में वज़ीराबाद घाट से लेकर कालिंदी कुंज घाट तक हजारों की संख्या में प्रकृति प्रेमी सुबह एकत्रित हुए।

राष्ट्रीय युवा नेता अनुपम ने कहा कि नदियों के तट पर ही मानव सभ्यताओं का निर्माण हुआ है। अगर नदियां नहीं बचीं, तो मानव सभ्यता नहीं बचेगी। दिल्ली का भविष्य अंधकार में आ जायेगा यदि उसे प्राण देने वाली यमुना नहीं बची।

अनुपम ने कहा कि यमुना की हालत आज बेहद चिंताजनक है। प्रदूषण और मानव व्यवहार के कारण नदी मरने की कगार पर है। जो नदी मनुष्यों को जीवन देती है, वो खुद मृत्यु शैय्या पर है। लेकिन ये देखा गया है कि यमुना में प्रदूषण की बहस अक्सर तभी चलती है जब छठ पर्व का समय आता है। इसके अलावा साल भर उदासीन रवैय्या बना रहता है। अनुपम ने कहा कि यमुना संसद द्वारा आयोजित मानव श्रृंखला का उद्देश्य है कि पर्यावरण को केंद्रीय विमर्श में लाया जाए। समाज में जागरूकता बढ़े और सरकारों पर दबाव बने ताकि ठोस कदम उठाए जा सकें। दिल्ली में लगभग एक लाख नागरिकों का यमुना तट पर एकत्रित होकर मानव श्रृंखला बनाना अद्भुत है।

कोई भी बड़ा काम जनभागीदारी और जनसंवाद से ही संभव है। यमुना को पुनर्जीवित करने के लिए सहभागिता और संवाद के जरिए ही समाधान निकल सकता है। यह मानव श्रृंखला इसी कड़ी में एक अहम कदम है जिसका असर दूरगामी होगा। यह मानव श्रृंखला यमुना संसद के बैनर तले बनायी गयी जिसके संयोजक रविशंकर तिवारी हैं।

इस मौके पर रविशंकर तिवारी ने दिल्लीवासियों का शुक्रिया अदा किया और यमुना की स्वच्छता के लिए प्रतिबद्ध रहने की अपील की। मानव श्रृंखला में विचारक के.एन. गोविंदाचार्य, दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय समेत कई राजनीतिक दल के नेताओं, सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *