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भारत को भ्रष्टाचार मुक्त और विकसित बनाने में पुस्तकालयों की भूमिका विषय पर व्याख्यान का आयोजन

दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा सतर्कता जागरूकता सप्ताह (31 अक्टूबर-6 नवम्बर 2022)
नई दिल्ली। दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा सतर्कता जागरूकता सप्ताह (31 अक्टूबर – 6 नवम्बर 2022) के अंतर्गत दिनांक 03 नवम्बर 2022 को दोपहर 03:00 बजे भारत को भ्रष्टाचार मुक्त और विकसित बनाने में पुस्तकालयों की भूमिका विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया । यह कार्यक्रम दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के अध्यक्ष श्री सुभाष चंद्र कानखेड़िया की अध्यक्षता एवं दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के महानिदेशक डॉ. आर. के. शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के प्राध्यापक एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी प्रो. जयदीप शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की सहायक पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, उर्मिला रौतेला द्वारा मंच संचालन करते हुए श्रोताओं के सम्मुख कार्यक्रम की विषय-वस्तु प्रस्तुत की गई तथा सर्वप्रथम दीप प्रज्ज्वलन तथा लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए मुख्य अतिथि तथा मंचासीन अधिकारियों को आमंत्रित किया गया।
महानिदेशक, डॉ. आर. के. शर्मा ने उपस्थित सभी गणमान्य जनों एवं श्रोताओं का कार्यक्रम में स्वागत किया । उन्होंने कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. जयदीप शर्मा का परिचय एवं कार्यक्रम की रूपरेखा रखी । सतर्कता जागरूकता पर चर्चा करते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार को अंतर्राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में साझा किया और भ्रष्टाचार मुक्त भारत के निर्माण के लिए सभी को जागरूक होने पर बल दिया है।
मुख्य वक्ता प्रो. जयदीप शर्मा ने बताया कि वह लगभग साढ़े तीन साल से इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में सतर्कता अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं । भ्रष्टाचार से मुक्ति में आचार-विचार और नैतिकता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । किसी भी संस्थान में कार्य करते हुए, हमें उस संस्थान को पूजा स्थल के रूप में देखना चाहिए और नैतिकता का पालन करना चाहिए। उन्होंने हमारे सभ्यता के विकास तथा पुस्तकालयों के विकास को समानांतर विकसित होने की प्रक्रिया बताया तथा यह भी बताया कि शिक्षा प्राप्ति की कोई आयु नहीं होती, यह जीवनपर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार पुस्तकालय वह हर कार्य करते हैं, जिससे राष्ट्र का उत्थान हो। उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र बनाने में देश के युवाओं की भूमिका पर बल दिया और भ्रष्टाचार को खत्म करने में शिक्षा का महत्व, जवाबदेही, नैतिकता, रिकॉर्ड प्रबंधन, सतर्कता मैनुअल, प्रौद्योगिकी, आईसीटी प्रबंधन आदि के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा की।
अध्यक्ष श्री सुभाष चंद्र कानखेड़िया ने भारत को संगठित करने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल को नमन करते हुए अपना वक्तव्य प्रारंभ किया । उन्होंने बताया कि हमारी समस्या यह है कि हम अपने लाभ के लिए नियमों को तोड़-मरोड़ देते हैं और यह अंतत: भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते है । किसी भी कार्य को करने से पहले हमें अपनी अंतरात्मा से यह चिंतन करना चाहिए कि जो हम करने जा रहे हैं वह सही है या नहीं ? उन्होंने कहा कि बचपन से बच्चों में सदगुणों और नैतिकता का प्रवाह करने में महिलाओं की अहम भूमिका है ।
अंत में उर्मिला रौतेला द्वारा आमंत्रित अतिथियों एवं श्रोताओं को धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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