वाशिंगटन : अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान को अपना समर्थन दोहराते हुए कहा है कि हाल के आतंकवादी हमलों के सामने पाकिस्तान अमेरिका का ‘मजबूत साथी’ रहा है और आगे भी बना रहेगा। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने सोमवार को एक साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में एक सवाल के जवाब में यह बयान दिया।
समाचारपत्र ‘डॉन’ के मुताबिक गत 30 जनवरी को पाकिस्तान पेशावर के रेड ज़ोन क्षेत्र में एक मस्जिद में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जहां 300 से 400 लोग, जिनमें अधिकांश पुलिस अधिकारी शामिल थे, नमाज अदा करने के लिए एकत्रित हुए थे। आत्मघाती विस्फोट ने नमाज कक्ष की दीवार और एक भीतरी छत को उड़ा दिया तथा कम से कम 84 लोगों की जान ले ली।
प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने शुरू में हमले की जिम्मेदारी ली थी। इसने बाद में खुद को इससे दूर कर लिया लेकिन पहले के सूत्रों ने संकेत दिया कि यह गैरकानूनी आतंकवादी समूह के कुछ स्थानीय गुट की करतूत हो सकती है।
पाकिस्तान में आतंकवाद की नए सिरे से लहर पर टिप्पणी करते हुए श्री प्राइस ने कहा,“यह एक संकट है जो पाकिस्तान को प्रभावित करता है, यह भारत को प्रभावित करता है, यह अफगानिस्तान को प्रभावित करता है। यह कुछ ऐसा है जिस पर हम पूरे क्षेत्र में ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।”
पाकिस्तान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा,“पाकिस्तान अमेरिका का एक महत्वपूर्ण भागीदार हैं, और कई मायनों में भागीदार हैं।” उन्होंने कहा,“हमने हाल के दिनों में इन सुरक्षा खतरों के सामने पाकिस्तान के साथ खड़े होने की अपनी प्रतिबद्धता के बारे में बात की है।”
पिछले कुछ महीनों में, आतंकवाद पूरे पाकिस्तान में फिर से सिर उठा रहा है, खासकर खैबर पख्तूनख्वाह और बलूचिस्तान में। पाकिस्तान ने पूरे देश में आतंकवादी हमलों में वृद्धि देखी है। माना जाता है कि अफगानिस्तान में स्थित टीटीपी नेताओं की ओर से इसकी योजना बनाई और निर्देशित की गई थी।
टीटीपी, जिसका अफगान तालिबान के साथ वैचारिक संबंध है, ने पिछले साल 100 से अधिक हमलों को अंजाम दिया, जिनमें से अधिकांश अगस्त के बाद हुए जब समूह की पाकिस्तान सरकार के साथ शांति वार्ता लड़खड़ाने लगी। टीटीपी की ओर से पिछले साल 28 नवंबर को औपचारिक रूप से संघर्ष विराम समाप्त कर दिया गया था।
पाकिस्तान हमारा मजबूत साथी:अमेरिका
