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हरिद्वार में प्ले स्कूलों की तर्ज पर ‘पालना केंद्र’ की शुरुआत

हरिद्वार : उत्तराखंड के हरिद्वार में सोमवार को गरीब एवं श्रमिक वर्ग की माताओं के छोटे बच्चों के लिए ‘पालना केंद्र’ की शुरुआत हुई जिसमें कामकाजी महिलाओं के छह माह से लेकर छह साल तक के बच्चों का पालन पोषण का होगा जो भी श्रमिक वर्ग की कामकाजी महिलाएं जिनके छोटे बच्चे हैं।
अक्सर छोटे बच्चों के कारण महिलायें कामकाज नहीं कर पाती हैं जिससे उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ता है। ऐसे में ‘पालना केंद्र’ में वह अपने बच्चों को छोड़कर निश्चिंत एवं निर्भीक होकर अपने कार्य पर जा सकेंगे और लौटते समय अपने बच्चों को अपने घर साथ वापस ले जा सकेंगे। इसकी शुरुआत प्ले स्कूलों की तर्ज पर की गई है जो की बिल्कुल निशुल्क रहेगी।
आज हरिद्वार में इसकी शुरुआत महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लगभग 34 आंगनबाड़ी केदो को पालना केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा जिसमें गरीब कामकाजी महिलाओं के छह माह से लेकर छह वर्ष तक के बच्चों को आठ घंटे रखा जा सकेगा। जहां पर उनकी पूरी देखभाल की जाएगी उनके सोने खाने पीने तथा शौचालय आगे की व्यवस्था रहेगी साथी इस पालन केंद्र में बच्चों के खेलने की भी सुविधा होगी। आंगनबाड़ी की कार्यकर्तायें उनकी देखभाल करेंगी जिससे महिलाएं निश्चिंत होकर अपने कामकाज पर जा सकेंगी और अपने परिवार का भरण पोषण के लिए काम कर सकेंगी।
वही श्रमिक कॉलोनी में रहने वाली बबीता का कहना है कि पालना केंद्र के रूप में उत्तराखंड सरकार एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कामकाजी महिलाओं को एक बड़ी सौगात दी है। अब महिलाएं पालना केंद्र में अपने बच्चों को छोड़कर अपने कामकाज पर जा सकती हैं और बच्चों की वहां पर पूरी पूरी देखभाल होगी। उनके सोने खाने से लेकर खेलने तक की व्यवस्था है इससे कामकाजी महिलाओं को बहुत राहत मिलेगी और वह निश्चिंत होकर कार्य करके आत्मनिर्भर बन सकेंगी तथा उनके बच्चे भी कुपोषण का शिकार होने से बच सकेंगे ।
वही लिंपम यादव का कहना है कि जो महिलाएं कामकाज करके अपने परिवार का हाथ बढ़ाना चाहती हैं परंतु छोटे बच्चों की वजह से वह मजबूर होकर काम नहीं कर पाती हैं। ऐसे में पालना केंद्र उनके लिए वरदान साबित होगा जहां वह अपने बच्चों को छोड़कर बिना किसी भय के बिना किसी चिंता के अपने काम पर जा सकेंगे और उनके बच्चों की भी अच्छे से देखभाल होगी साथ ही महिलाएं सशक्त होंगी और अपने परिवार एवं पति का हाथ बटाने में सक्षम होगी। यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक सशक्त कदम है जिससे पालना घर बनने से कामकाजी महिलाओं को बहुत बड़ी मदद होगी।
वहीं महिला श्रमिक ममता भी पालना घर के बनने से बहुत ही खुश हैं उनका कहना है कि छोटे बच्चों को हम घर पर छोड़कर नहीं जा सकते और जिन घरों में बच्चों को संभालने वाले बुजुर्ग आदि नहीं है उनके लिए पालना घर बहुत ही बड़ी सौगात है अब महिलाएं निश्चिंत होकर पालना घर में अपने बच्चों को छोड़कर कामकाज पर जा सकेगी और बच्चों को यहां खेलने से लेकर खाने-पीने सोने तथा सोने खेलने आदि की भी व्यवस्था होगी। जिससे महिलाएं भी अपने परिवार का सहारा बनकर परिवार की आय बढ़ाने में मदद कर सकेंगी। उन्होंने इसके लिए प्रदेश सरकार एवं केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया।

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