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“डिजिटल युग में लैंगिक समानता और महिला अधिकारिता” विषय पर पैनल चर्चा का आयोजन

नई दिल्ली : दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य पर दिनांक 10 मार्च 2023 को अपराह्न 3.00 बजे “डिजिटल युग में लैंगिक समानता और महिला अधिकारिता” विषय पर पैनल चर्चा का आयोजन किया गया । दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के अध्यक्ष श्री सुभाष चंद्र कानखेड़िया की अध्यक्षता एवं महानिदेशक डॉ. आर. के. शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली उच्च न्यायलय के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एस. एन. ढींगरा, मॉडरेटर के रूप में संस्थापक निदेशक SMART एवं दिल्ली स्थित फिल्म निर्माता श्रीमती अर्चना कपूर, पैनलिस्ट के रूप डिप्टी कंट्री रिप्रेजेंटेटिव यू एन वीमेन सुश्री कांता सिंह, दूरदर्शन समाचार की पूर्व प्रमुख संवाददाता सुश्री पूनम डबास एवं दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड की सदस्या श्रीमती विभा लाल चावला उपस्थित रहे। साथ ही, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड की सदस्या डॉ. रुचिका राय मदान की कार्यक्रम में विशेष उपस्थित रहीं। दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की सहायक पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी श्रीमती उर्मिला रौतेला द्वारा विशिष्ट अतिथियों को मंच पर आमंत्रित किया गया तथा दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया I

डॉ. आर. के. शर्मा ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की रूपरेखा रखते हुए गणमान्य वक्ताओं, अतिथिगणों का स्वागत कर उनका परिचय श्रोताओं को प्रदान किया। अपने जीवन अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने जन साधारण में क्रांति का बीज बोकर महिला सशक्तिकरण हेतु योगदान देने का आवाहन किया। उन्होंने कहा कि जब तक हम दैनिक जीवन से जुड़ी छोटी छोटी बातों में महिलाओं के सम्मान के लिए आवाज नहीं उठाएंगे तब तक महिलाओं का पूर्ण रूप से सशक्तिकरण नहीं हो सकता।
माननीय न्यायाधीश एस. एन. ढींगरा ने बताया कि डिजिटल क्रांति अभी शुरुवाती चरण पर है। कोई भी तकनीकी क्रांति लैंगिक भेद नहीं करती। परंतु आज कल जिस प्रकार डिजिटल क्रांति का प्रयोग हो रहा है वह हम सभी के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। ट्रॉलिंग भी उसी का एक उदाहरण है। किसी भी क्रांति का प्रयोग हम अच्छे बुरे दोनों प्रकार के कार्यों में कर सकते हैं। यह हम पर निर्भर करता है कि हम किस दिशा में उसका प्रयोग कर रहे हैं और सही दिशा में डिजिटल क्रांति का प्रयोग करना सही शिक्षा पर निर्भर करता है। वैश्विक स्तर पर महिलाओं की स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने महिलाओं की शिक्षा व स्वतंत्रता की स्थिति पर प्रकाश डाला । केकई का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भारत में प्राचीन काल से ही नारी को सदैव सम्मान की दृष्टि से देखा गया है । लैंगिक समानता हमारे मनोविज्ञान से जुड़ी है अतः जब तक हम स्वयं के विचार नहीं बदलेंगे समानता नहीं आएगी। आवश्यकता है कि हम नारी को सम्मान दे तथा अपनी संस्कृति को पहचाने । महिला सशक्तिकरण की शुरुवात हमें अपने घर से करनी चाहिए। अपनी बेटियों और बहुओं को सम्मान और समान अधिकार देने चाहिए और डिजिटल क्रांति का सही प्रयोग करना चाहिए ।
श्री सुभाष चंद्र कांखेड़िया ने जयशंकर प्रसाद जी की रचना कामायनी से कुछ पंक्तियों का पाठ करते हुए नारी के प्रति अपनी सम्मान पूर्ण भावनाओं को व्यक्त किया। अध्यक्ष महोदय ने महात्मा बुद्ध एवं बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु बहुमूल्य योगदान को भी सभी से साझा किया ।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में पैनल चर्चा के अंतर्गत श्रीमती अर्चना कपूर ने महिलाओं की स्थिति, उनकी चुनौतियों, उनके योगदान आदि पर विस्तार से चर्चा की तथा डिजिटल अधिकारों की समानता पर भी उन्होंने प्रकाश डाला ।
सुश्री कांता सिंह ने कहा कि जब कानूनी तौर पर महिला पुरुष समान हैं तो हमें हर वर्ष महिला दिवस मनाने और उनके सशक्तिकरण से संबंधित आंकड़ों को साझा करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है । उन्होंने कहा कि तकनीक हमारे हाथों में है । यह हम पर निर्भर करता है कि हम उसका प्रयोग किस प्रकार करते हैं । साथ ही, जमीनी स्तर पर महिलाओं के प्रति भेदभाव को रोकने, शिक्षा का समान अधिकार देने से ही हम महिलाओं की स्थिति में सुधार ला सकते हैं। उन्होंने कहा महिलाओं में साहस का कभी अभाव नहीं रहा। अभाव रहा है तो समान अधिकारों का। समृद्ध परिवारों में भले ही यह स्थिति ना हो परंतु मध्यम एवं निम्न वर्ग में निश्चित ही पुरुषों को महिलाओं के ऊपर की आंका जाता है। अतः इस स्थिति में सुधार लाने की आवश्यकता है।
सुश्री पूनम डबास ने बताया कि उन्हें बचपन से ही शिक्षा और उनकी महत्वाकांक्षाओं को पाने में उनके सम्मुख किसी प्रकार की कोई बाधा नहीं आई, ना ही महिला होने के कारण उन्हें किसी प्रकार का कोई भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि मानव जीवन संघर्षों से भरा है। हमें आवश्यकता है अपने अधिकारों को जानने की, अपनी अन्दर की हिम्मत को पहचानने की । ग्रामीण एवं सुविधाओं के अभाव में रहने वाली महिलाओं को निश्चित ही भेदभाव का सामना करना पड़ता है, परंतु महिलाएं अब जागरूक हैं और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी और डिजिटल क्रांति में महिलाओं की स्थिति बदलने की शक्ति है ।
श्रीमती विभा लाल चावला ने आकस्मिक कारणों की वजह से उन्हें अपने पारिवारिक ऑटोमोबाइल व्यवसाय से जुड़ना पड़ा जिसके लिए वह स्वयं तैयार नहीं थीं। ऑटोमोबाइल व्यवसाय जोकि मूलतः पुरुष प्रधान व्यवसाय है, इससे जुड़े अपने अनुभवों को उन्होंने सभी के साथ सांझा किया । महिलाओं को समान अधिकार देने हेतु उनके द्वारा किए गए प्रयासों को के बारे में बताया । अपने जीवन से जुड़े कई वृतान्तों को उल्लेख करते हुए उन्होंने डिजिटल युग में महिलाओं द्वारा सामना की जाने वाली विभिन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
अंत में, सहायक पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, श्रीमती उर्मिला रौतेला द्वारा सभी अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ ।

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