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पटेल ने एसीबी के चिंतन शिविर का किया उद्घाटन

गांधीनगर : भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) अधिकारीयों के पहले चिंतन शिविर का बुधवार को उद्घाटन किया। पटेल ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध मजबूती से जन आंदोलन शुरू किया है। पूरी दुनिया की नज़र आज भारत में आए बदलाव और विकास की गति की तरफ है जिसके मूल में उनके जैसा सक्षम नेतृत्व और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति है।
उन्होंने कहा कि जो हमारे अधिकार का नहीं है, उसे येन-केन-प्रकारेण लेना या छीनना धार्मिक, आध्यात्मिक और कानूनी तौर पर अपराध है। एसीबी ऐसे लोगों को बेनकाब कर अथवा निर्मूल कर समाज में एक उदाहरण स्थापित करने की भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में गलत कार्य करने वालों को सजा मिलने की शुरुआत हो गई है और उनका जीरो टॉलरेंस का ध्येय भी साकार हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुख की व्याख्या केवल भौतिक सुख-सुविधा नहीं है। आंतरिक सुख ही सच्चा सुख है। आज के समय में मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे जी रहा है। सुख की इस अपेक्षा को पूरा करने के लिए उसे आय के अन्य संसाधनों तथा आय प्राप्त करने के लिए गलत रास्तों या हथकंडों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसी आय के सुख में परिवार के सभी लोग भागीदार बनते हैं, लेकिन जब अपराध की सज़ा मिलती है, तो उस व्यक्ति को अकेले ही कष्ट सहना पड़ता है। इस संदर्भ में उन्होंने वालिया से ऋषि बने वाल्मिकी का उदाहरण दिया।
उन्होंने एसीबी अधिकारियों को प्रोत्साहित करते हुए जोड़ा कि जब गलत काम करने वालों को सजा तो मिलती ही है, तब हमारे लिए जरूरी है कि हम सरकार के नियमों का पालन करें और अन्यों से भी पालन करवाएं। उन्होंने एसीबी अधिकारियों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में ढिलाई न बरतने की प्रेरणा देते हुए कहा कि सही काम में सरकार भी आपके साथ है।
भूपेंद्र पटेल ने एसीबी कार्यकर्ताओं को आह्वान किया कि वे प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारतएट2047’ के संकल्प को पूर्ण करने के लिए गुजरात में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई में अपना अग्रिम योगदान दें। एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा राज्य के स्कूली बच्चों को भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में जोड़ने के उद्देश्य से जागरूकता सप्ताह के तहत ‘भ्रष्टाचार की पोल खोलो’ विषय पर एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस शिविर में गुजराती, हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में निबंध लेखन के प्रथम तीन विजेता विद्यार्थियों को उनके द्वारा सम्मानित किया गया।
मुख्य सचिव राज कुमार ने कहा कि समाज में भ्रष्टाचार की बुराई को रोकने के लिए यह चिंतन शिविर काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। इतना ही नहीं, यह शिविर आज के समय की मांग है। भ्रष्टाचार समाज में एक ऐसा दीमक है जो समाज और देश को अंदर से खोखला कर विकास में बाधा डालता है। भ्रष्टाचार के दूषण पर अंकुश लगाने के लिए व्यवस्था में अधिक से अधिक पारदर्शिता लानी होगी। सूचना का अधिकार जैसे मजबूत कानून का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। यदि कोई नागरिक रिश्वत नहीं देना चाहता, तो हमें उसके संकल्प का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के दूषण को रोकने के लिए संविधान में बनाए गए विभिन्न कानूनों का अधिकतम उपयोग करना जरूरी है।
मुख्य सचिव ने कहा कि रिश्वत लेने का जो तरीक़ा लोगों द्वारा अपनाई जाता है, उस पर एक नियमावली भी जारी किया जाना चाहिए; जिससे सामान्य नागरिकों में इसके प्रति जागृति आए और वे भ्रष्टाचार को रोकने में मदद कर सकें। उन्होंने इस प्रकार के पहले चिंतन शिविर की पहल के लिए सभी को बधाई दी।
भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो के प्रमुख शमशेर सिंह ने राज्य में आयोजित इस प्रथम चिंतन शिविर की रूपरेखा देते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा घूसखोरी को रोकने के लिए 1064 टोल फ्री नंबर शुरू किया गया है और नागरिक इसका अधिकतम उपयोग कर भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का सहयोग कर रहे हैं। एसीबी द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई को और अधिक प्रभावी व तेज बनाने के इस चिंतन शिविर का आयोजन किया गया है। इसमें पहले, लोकपाल आई. पी. गौतम, सीबीआई-एसीबी के सेवानिवृत्त अधिकारी, पूज्य ज्ञान वत्सल स्वामी सहित विशेषज्ञों ने शिविर में भाग लिया और अपने विचार और अनुभव साझा किए। एसीबी के संयुक्त निदेशक मकरंद चौहाण ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
‘भ्रष्टाचार का विरोध करें और राष्ट्र के प्रति समर्पित रहें’ के मूलमंत्र के साथ आयोजित इस चिंतन शिविर में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश पुरी, राज्य पुलिस महानिदेशक विकास सहाय, सतर्कता आयोग की आयुक्त श्रीमती संगीता सिंह सहित एसीबी के राज्यभर के उच्चाधिकारी तथा विद्यार्थी सहभागी हुए।

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