नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने देश भर में इस वर्ष कारायी जाने वाली 21वीं पशुधन गणना के लिए त्रंत को संवेदनशील बनाना शुरू कर दिया है। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी विभाग की सचिव (डीएएचडी) अलका उपाध्याय ने गुरुवार को राजधानी में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों तथा तकनीकी समिति के सदस्यों के साथ 21वीं पशुधन गणना के लिए मशीनरी को संवेदनशील बनाने के बारे में बैठक की ।
प्रत्येक पांच वर्ष पर करायी जाने वाली पशुधन गणना इस वर्ष सितंबर-दिसंबरमें करायी जानी है। इसमें मोबाइल प्रौद्योगिकी के उपयोग तथा डेटा को ऑनलाइन प्रसारित करने के साथ राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की भागीदारी में आयोजित की जाएगी।
मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के मुताबिक गणना सभी गांवों और शहरी वार्डों में की जाएगी। यह गणना पशुओं की विभिन्न प्रजातियों (मवेशी, भैंस, मिथुन, याक, भेड़, बकरी, सुअर, घोड़ा, टट्टू, खच्चर, गधा, ऊंट, कुत्ता, खरगोश और हाथी) तथा पोल्ट्री पक्षियों (मुर्गी, बत्तख और अन्य पोल्ट्री पक्षी) से सम्बंधित होती है।
ये सभी पशु-पक्षी घरों, घरेलू उद्यमों और गैर-घरेलू उद्यमों द्वारा पाले जाते हैं। इसके तहत इन विशेष स्थानों पर रखे जाने वाले पशु-पक्षियों की नस्लों, उनकी उम्र तथा उनके लिंग के आधार गणना की जाएगी। यह बैठक में पशुधन गणना के मंतव्य को पूरा करने के लिए तैयार किए गए सर्वेक्षण कार्यक्रम पर तथा राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों के स्तर पर तैयारियों पर चर्चा और उसका आकलन करने के लिए की गयी।
इस अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग की अपर सचिव वर्षा जोशी, पशुपालन आयुक्त सह टीसीडी अध्यक्ष अभिजीत मित्रा, पशुपालन एवं मत्स्यपालन विभाग के सलाहकार (सांख्यिकी) जगत हजारिका और केंद्र तथा राज्य सरकारों के प्रमुख सचिव, सचिव, आयुक्त, निदेशक और अन्य वरिष्ठ सदस्यों सहित एनएडी-एमओएसपीआई, पंचायती राज मंत्रालय के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
पशुधन गणना के लिए मशीनरी को संवेदनशील बनाने की तैयारी
