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पुराने टेलीकॉम कानूनों में बदलाव की तैयारी, केंद्र ने मांगे सुझाव

नई दिल्ली: केन्द्रीय संचार, इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज कहा कि पुराने टेलीकॉम कानूनों के स्थान पर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुये नये कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू की गयी है जिसमें सभी हितधारकों को अपने विचार देने चाहिए। अश्विनी वैष्णव ने आज रात यहां इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2022 की घोषणा के लिए आयोजित कार्यक्रम में कहा कि वर्ष 1885, 1930और 1950 के पुराने कानूनों में व्यापक बदलाव की जरूरत है क्योंकि अभी के समय और भविष्य की जरूरताें के अनुरूप कानून बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए दूरसंचार विभाग ने दूरसंचार क्षेत्र में एक नयी कानूनी संरचना की आवश्यकता पर एक परामर्श पत्र तैयार किया है। परामर्श पत्र हितधारकों से विचार आमंत्रित किये गए हैं, जिसकी अंतिम तिथि 25 अगस्त, 2022 है।

उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों ने भी इसमें बढ़चढ़कर सुझाव देने की अपील की और कहा कि जो आप अभी निवेश कर रहे हैं आने वाले दिनों में आपकों बहुत बड़ा अवसर मिलने वाला है क्योंकि देश अभी 5 जी के साथ ही 6जी की ओर भी बढ़ रहा है। लोगों की जरूरतों में बदलाव आया है और लोगों ने प्रौद्योगिकी को बड़ी तेजी से अपनाना शुरू कर दिया है।

भारत में दूरसंचार के लिए कानूनी संरचना उन कानूनों द्वारा शासित होती है, जिन्हें भारत के स्वतंत्र होने से बहुत पहले बनाया गया था। हाल के दशकों में प्रौद्योगिकी काफी विकसित हुई है। उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बिठाने के लिए, अधिकांश देशों में दूरसंचार कानून समय के साथ विकसित हुए हैं। इनमें अमेरिका (1996), ऑस्ट्रेलिया (1979), यूनाइटेड किंगडम (2003), सिंगापुर (1999), दक्षिण अफ्रीका (2000) और ब्राजील (1997) शामिल हैं। हितधारक बदलती प्रौद्योगिकी से तालमेल के लिए कानूनी संरचना को विकसित करने की मांग कर रहे हैं।

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