कमिश्नर बोले- ड्राइवर के गाड़ी चलाने की बात झूठी, सीसीटीवी फुटेज में नाबालिग शराब पीता दिखा
पुणे। पोर्श एक्सीडेंट मामले में स्पेशल कोर्ट ने शुक्रवार (24 मई) को आरोपी नाबालिग के पिता विशाल अग्रवाल समेत सभी छह आरोपियों को 7 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार का कहना है कि इस मामले में पुलिस का पक्ष रखने के लिए स्पेशल काउंसिल नियुक्त किए जाएंगे।
आरोप है कि नाबालिग ने 18 मई की रात शराब के नशे में अपनी पोर्श कार से बाइक को टक्कर मारी थी। हादसे में मध्य प्रदेश के रहने वाले इंजीनियर अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा की मौत हो गई थी।
पुलिस कमिश्नर ने कहा- आरोपी को बचाने के लिए सबूतों से छेड़छाड
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई थी। ताकि यह दिखाया जा सके कि आरोपी नाबालिग गाड़ी नहीं चला रहा था। पुलिस ने आरोपी के पिता, बार मालिकों और मैनेजर के खिलाफ दर्ज एफआईआर में धोखाधड़ी की धारा 420 भी जोड़ी है।
कमिश्नर ने कहा, हमारे पास नाबालिग के पब में शराब पीते हुए सीसीटीवी फुटेज हैं। ऐसे में हम सिर्फ ब्लड सैंपल रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहेंगे। साथ ही इंटरनल इन्क्वॉयरी में पता चला है कि कुछ पुलिसकर्मियों की ओर से चूक हुई थी और सबूत नष्ट करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नाबालिग के पिता-दादा का दावा था- गाड़ी ड्राइवर चला रहा था
आरोपी नाबालिग के दादा सुरेंद्र अग्रवाल ने 23 मई को दावा किया था कि घटना के वक्त कार उनका फैमिली ड्राइवर चला रहा था। नाबालिग के दोस्तों ने भी ड्राइवर की बात कही है। पुलिस की पूछताछ में ड्राइवर ने भी अपने पहले बयान में गाड़ी चलाने की बात स्वीकार की है।
वहीं, पुलिस की गिरफ्त में मौजूद आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल ने भी पुलिस को कहा था कि गाड़ी उसका बेटा नहीं, बल्कि हमारा फैमिली ड्राइवर चला रहा था। वहीं, पुलिस ने विशाल का फोन जब्त किया है। विशाल की कॉल डिटेल और अन्य जानकारी निकालने की कोशिश कर रही है।
दूसरी तरफ पुणे के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय आरोपी नाबालिग को 25 साल की उम्र के पहले लाइसेंस जारी नहीं करेगा। साथ ही आरटीओ ने पोर्श कार का टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन 12 महीने के लिए रद्द कर दिया है।
पुणे एक्सीडेंट केस-6 आरोपी 7 जून तक न्यायिक हिरासत में
